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देश की बात सुनाता हूं

केबीसी में 5 करोड़ जीतने वाले सुशील कुमार कहां गुम हो गए? देखें देश की बात

22 अक्टूबर 2021

इस वक्त देश में एक बार फिर कौन बनेगा करोड़पति का सीजन चल रहा है. हर घर में लोग सवालों का जवाब याद कर रहे हैं. लेकिन इन सवालों का जवाब देकर 5 करोड़ जीतने वाले एक विजेता को सब लोग भूल चुके हैं. केबीसी फाइव के विनर सुशील कुमार ने पच्चीस सवालों का जवाब देकर पांच करोड़ कमा लिया. इतनी बड़ी रकम जीतने के बाद बिहार में मोतिहारी के सुशील कुमार रातों रात स्टार बन गए. पूरे देश की नजरें उन पर टिकी थीं, लेकिन आज सुशील कुमार कहां हैं, किस हाल में हैं? देखें देश की बात सोनू सूद के साथ.

87 साल के पेड़ पर बना डाला शानदार 4 मंजिला घर, देखें

21 अक्टूबर 2021

झीलों के शहर उदयपुर में एक इंजीनियर साहब हैं जिन्होंने 89 बरस के पेड़ पर अपना ठिकाना बना डाला. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नलॉजी से पढ़े केपी सिंह ने पेड़ पर ऐसा शानदार घर बनाया कि उदयपुर में इनका ये घर अब टूरिस्ट स्पॉट बन चुका है. आपने बहुत ट्री हाउस पहले भी देखे होंगे पर केपी सिंह ने जो किया वो नया है. केपी सिंह का ये घर साइंस और प्रकृति प्रेम का बेजोड़ नमूना है. 4 मंजिल के घर में स्टील ग्रिड और फाइबर इस्तेमाल किए गए हैं. यहां पेड़ की डालियों को सोफा-कुर्सी-स्टूल की जगह इस्तेमाल किया जाता है. देखें देश कि बात सोनू सूद के साथ.

वात्सल्य ग्राम की गोद में पलते हैं ठुकराए बच्चे, देखें देश की बात सोनू सूद के साथ

20 अक्टूबर 2021

वात्सल्य ग्राम, परमशक्ति पीठ द्वारा संचालित एक अनाथालय है. साध्वी ऋतंभरा ने 27 साल पहले वृंदावन में वात्सल्य ग्राम की स्थापना की थी. यहां करीब 20 परिवार है जिनमें 150 बच्चे, लड़कियां और महिलाएं रहती हैं. ये उन बच्चों का घर है जिनके माता-पिता ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया. आवास, भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा, जीवन की सारी बुनियादी जरूरतें यहां पूरी होती हैं. आप यहां धर्म का सबसे सुंदर रूप देख सकते हैं. वात्सल्य ग्राम के पीछे वो सोच है जिसमें व्यावसायिकता और भावहीनता के स्थान पर समाज के सामने एक ऐसा मॉडल रखना जो भारत की परिवार की परम्परा को सहेज कर भविष्य का निर्माण करें. देखें देश की बात सोनू सूद के साथ.

देखें, लोकेश वर्मा के वर्ल्ड क्लास टैटू आर्टिस्ट की कहानी

18 अक्टूबर 2021

एक बच्चा था उसके पापा फौज में थे और मां घर संभालती थीं. बच्चा पढ़ता तो था लेकिन टॉपर नहीं था. उसने बहुत कोशिश की लेकिन केवल पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा सका. वो पैसे कमाने का कोई मौका नहीं छोड़ता था. कभी पर्चे बांटता. कभी बर्गर की दुकान में पोछा लगाता. कभी सीडी बेंचता फिर उसने एक दिन किसी के शरीर पर टैटू देखा. उसने तय किया कि अपनी जिंदगी के अनुभव वो अपने शरीर में दिखाएगा. आज उसके नाम गिनीज बुक रिकॉर्डस हैं. पूरी दुनिया में उसका नाम है.

मां की देखभाल के लिए छोड़ी नौकरी , बने मिसाल

16 अक्टूबर 2021

लखनऊ के रहने वाले सुभाष ने अपनी मां को अपनी दुनिया बना कर एक मिसाल कायम कर दी है. 50 साल के सुभाष ने उस वक्त सब कुछ मां को अपना जीवन समर्पित करने की ठान ली जब उनकी जिंदगी में एक हादसा गुजरा, उस हादसे में सुभाष ने अपने पिता को खो दिया और मां हमेशा के लिए बिस्तर पर पड़ गई उस मां की देखभाल के लिए नौकरी तक छोड़ दी, सुभाष की ये कहानी हम सब के लिए एक सीख है .

दोनों किडनियां हुईं फेल तो नौजवान बेटे ने किडनी देकर बचाई पिता की जान, देखें

15 अक्टूबर 2021

कंधे में एक डंडे के सहारे दो टोकरी लटकाईं, मां-बाप को उसमें बिठाया और तीर्थयात्रा पर निकल गए. श्रवण कुमार का नाम आते ही दृष्टिहीन माता-पिता और उनका आज्ञाकारी बेटा याद आता है. जिसने अपने मां-बाप की इच्छा पूरी करने के लिए पैसा न होने पर पैदल ही तीर्थयात्रा शुरू कर दी. आज जब हमारे समाज में बुजुर्गों के साथ हिंसा के मामले बहुत बढ़ रहे हैं तो लगता है कि हमने श्रवण कुमार को भुला दिया है. लेकिन ऐसा नहीं है आज भी हमारे बीचे ऐसे बेटे हैं जो अपने माता-पिता के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं. आज सोनू सूद देश की बात में ऐसे ही बेटों से रूबरू करा रहें हैं. देखें.

कुलसुम की अनूठी पहल से एसिड अटैक सर्वाइवर्स को मिली नई पहचान, देखें

14 अक्टूबर 2021

बेंगलुरू की कुलसुम शादाब सुंदरता की नई परिभाषा गढ़ रही हैं. कुलसुम की मदद से पूरे देश के एसिड अटैक सर्वाइवर्स को नई पहचान मिल रही है. वे एसिड अटैक पीड़ितों को मदद पहुंचा रही हैं और ये मदद मेडिकल से लेकर हर तरह की होती है. त्रासदी अंत नहीं शुरुआत का कारण भी बनती है. दुनिया के नामी फैशन शो मिलान फैशन वीक में भारत के एसिड अटैक सर्वाइवर्स का वीडियो शूट इसकी मिसाल है. और इन सबके पीछे कुलसुम शादाब हैं. कुलसुम हजारों की जिंदगी में उम्मीद का उजाला भर रहीं हैं. देखें देश की बात सोनू सूद के साथ.

कोरोना काल में नवीन ने किया शवों का अंतिम संस्कार, US से मदद लेकर बनाया हाईटेक शवदाह गृह, देखें

14 अक्टूबर 2021

कोरोना काल में लोगों ने अपनों को खोया भी, और खुद मौत से लड़कर लौटे भी. उस दौरान जो मुद्दा सबसे ज्यादा उभर कर आया वो था, शवों को दाह संस्कार का. लेकिन इस मुश्किल वक्त में लोगों कि मदद की दरभंगा के नवीन सिन्हा ने, सिर्फ नवीन ही नहीं उनके साथियों ने भी इस मुहिम में इनके साथ रहे. इनका मकसद था की कोरोना काल में ज्यादा से ज्यादा लोंगों की मदद कर सकें. कोरोना काल में जब मौत का आंकड़ा बढ़ने लगा तो नवीन आधुनिक तकनीक से लोगों का अंतिम संस्कार करवाया. देखें देश की बात सोनू सूद के साथ.

कोरोना काल में अस्पताल में भर्ती मरीजों को बिग बी के हमशक्ल ने ऐसे बांटी खुशियां, देखें

14 अक्टूबर 2021

कोरोना के दौरान लोगों को अस्पताल में ऑक्सीजन , दवा, बेड, खाना और तमाम समस्याएं हुईं. इनका सबने अपने अपने स्तर पर समाधान भी दिया. लेकिन कुछ समस्याएं ऐसी भी थीं जिनके बारे में ज्यादा लोंगों ने नहीं सोचा. कोरोना से बीमार होने वाले लोगों को इलाज के लिए अकेले रहना पड़ता था. इस क्वारंटाइन टाइम में बीमारी का डर और अकेलापन दोनो परेशान करते थे. इस डर और अकेलेपन को दूर करने का काम कुछ लोगों ने किया. इनमें से एक सज्जन तो अमिताभ बच्चन बन कर लोगों की मदद कर रहे थे. अमिताभ बच्चन के डुप्लीकेट शशिकांत पेडवाल ने कोरोना काल में उन मरीजों का हौसला बढ़ाया जो जिंदगी के सबसे बुरे दौर से गुजर रहे थे. देखें देश की बात सोनू सूद के साथ.

रेडियो पर फरमाइशी गीत सुनने के लिए लिख डालीं साढ़े छह लाख चिट्ठियां, देखें देश की बात सोनू सूद के साथ

12 अक्टूबर 2021

आजादी के बाद हमारे देश में मनोरंजन के साधन बहुत कम थे. फिल्मे थीं लेकिन थिएटर में और गाने थे लेकिन रेडियो में. इसलिए अगर आपको अपनी पसंद के गाने सुनने होते थे तो फरमाइश करनी होती थी. फरमाइश भी ऐसे नहीं कि फोन उठाया और रेडियो जॉकी को घुमा दिया. एक गाना सुनने के लिए पोस्ट ऑफिस से अपने इलाके के रेडियो स्टेशन के नाम चिट्ठी लिखनी होती थी. और फिर जब वो चिट्ठी आकाशवाणी स्टेशन पहुंचती उसका नंबर आता तो फरमाइशी नगमा सुनाया जाता. कितना लंबा काम और कितना लंबा इंतजार. फिर भी कटनी के अनिल ताम्रकार ने फरमाइशी गीत सुनने के लिए साढ़े छह लाख चिट्ठियां लिख दी. ये एक रिकॉर्ड है. देखें देश की बात सोनू सूद के साथ.

क्रॉकरी बैंक से कैसे प्रदूषण पर लगाम रही हैं समीरा सतीजा? देखें

11 अक्टूबर 2021

पर्यावरण को प्लास्टिक से बचाने के लिए एक महिला कुछ ऐसा कर रही है, जिसकी तारीफ बिना किए आप नहीं रह सकते. आज तक आपने ब्लड बैंक, पैसों की लेन देन करने वाली बैंक, लोन बैंक और इसी तरह के बैंको के बारे में सुना है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्रॉकरी बैंक जैसा भी कुछ हो सकता है. यह अनूठी और अलग पहल की है गुडगांव की रहने वाली 48 वर्षीय समीरा सतीजा ने. पेशे से सरकारी नौकरी करने वाली समीरा साल 2018 में एक ऐसा बैंक चला रही हैं, जिसमें आपको ना पैसा देना होगा ना किसी तरह की कोई औपचारिकता करनी होगी. दरअसल यह बैंक अपने आप में खास है क्योंकि यह एक ऐसा बैंक है जहां पर आपको लोन नहीं बल्कि बर्तन मिलेंगे. क्रॉकरी बैंक फॉर एवरीवन नाम की यह बैंक आपको स्टील के बर्तन किराए पर देती है ताकि प्लास्टिक के डिशेज और गिलास का इस्तेमाल को टाला जा सके जिससे पर्यावरण में बड़ी मात्रा में हो रहे प्लास्टिक के पद्रूषण को रोका जा सके. देखें देश की बात, सोनू सूद के साथ.