बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हनुमान जी की आठ सिद्धियों में से अणिमा, महिमा और गरिमा के महत्व पर प्रकाश डाला है. उन्होंने बताया कि 'अणिमा सिद्धि से हनुमान जी मच्छर के समान सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं, जिसका प्रयोग उन्होंने लंका प्रवेश और सुरसा के मुख में प्रवेश करते समय किया.' शास्त्री जी ने चुटीले अंदाज में सुरसा प्रसंग की तुलना आधुनिक एंडोस्कोपी से की. उन्होंने महिमा सिद्धि का वर्णन करते हुए बताया कि इससे हनुमान जी ने अपना शरीर 32 योजन तक विशाल कर लिया था. वहीं, गरिमा सिद्धि का उदाहरण देते हुए उन्होंने महाभारत काल के उस प्रसंग का जिक्र किया जब हनुमान जी ने अपनी पूंछ का वजन इतना बढ़ा दिया था कि बलशाली भीम भी उसे हिला नहीं सके थे. पूरे प्रवचन में उन्होंने हनुमान जी की शक्ति और उनकी पूंछ के प्रताप को रोचक कथाओं के माध्यम से समझाया.