देश में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 15 फीसदी कम दर्ज की गई है, जो पिछले 17 वर्षों के सबसे कम आंकड़ों में शामिल है। 1 जून से 21 सितंबर के बीच सामान्य 827 मिमी की तुलना में महज 703 मिमी वर्षा दर्ज हुई। कम वर्षा और सुपर अल नीनो के प्रभाव के चलते आंध्र प्रदेश, पंजाब, बिहार, कर्नाटक और केरल जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में जलाशयों का जलस्तर और भूजल स्तर प्रभावित हुआ है, जिससे खरीफ और आगामी रबी फसलों पर असर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों ने स्थिति से निपटने के लिए ड्रिप इरिगेशन, फसल चक्र में बदलाव और मिलेट्स को बढ़ावा देने पर बल दिया है। वहीं, खाद्य कीमतों को स्थिर रखने के लिए बफर स्टॉक, जल संरक्षण, डैम प्रबंधन और नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया है।