प्रयागराज में चल रहे पवित्र माघ मेले में आस्था के कई अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं. इन्हीं में से एक हैं 65 वर्षीय स्वामी अमोहा नंद महाराज, जो मेले में स्कूटी पर घूमते हैं. जमींदार परिवार में जन्मे स्वामी अमोहा नंद महाराज का बचपन से ही हनुमान जी से विशेष लगाव था और पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने साधु जीवन जीने का निर्णय लेकर विवेकानंद आश्रम से जुड़ गए. उनकी दिनचर्या सुबह 5 बजे पूजा से शुरू होती है. मेले में एक और अनोखे कल्पवासी हैं, रायबरेली के 59 वर्षीय सेवानिवृत्त सैनिक रंजीत सिंह, जिन्होंने 20 साल से अन्न का त्याग कर सिर्फ फलाहार पर जीवन जी रहे हैं. वहीं, चित्रकूट के 'फटीचर बाबा' का शिविर भी है, जहां के साधु भिक्षा नहीं मांगते, बल्कि खुद खाना बनाकर जरूरतमंदों को खिलाते हैं. इसके अतिरिक्त, गंगा को स्वच्छ रखने के लिए यूपी जल निगम ने एक अस्थायी जल उपचार संयंत्र भी स्थापित किया है.