यह कहानी दर्द से शुरू होकर हिम्मत, संघर्ष और आत्मनिर्भरता पर आकर ठहरती है। यह उन एसिड अटैक सर्वाइवर्स की कहानी है जिन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल के आगे घुटने नहीं टेके। एक सर्वाइवर कहती हैं, 'चेहरा तुम बंद करो मुझे बंद करने की जरूरत नहीं है, आंखें तुम्हारी गंदी है, मेरी आंखें बहुत साफ है तो मैं ऐसे ही चलूंगी और ऐसे ही रहूंगी।' इस रिपोर्ट में कई महिलाओं ने अपनी आपबीती साझा की, जिसमें किसी को उसके पति ने, किसी को सौतेली माँ ने, तो किसी को पड़ोसी ने एसिड से जला दिया। इन महिलाओं ने छांव फाउंडेशन और सिरोज हैंगआउट कैफे के माध्यम से न केवल एक नया जीवन शुरू किया, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी कायम की। इनमें से एक महिला को एक दिन के लिए जिले का डीएम भी बनाया गया, तो किसी ने 'छपाक' जैसी फिल्म में भी काम किया। ये सभी अब आत्मनिर्भर हैं और दूसरों को हौसला दे रही हैं।