देश में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। एक तरफ मानसून के समय से पहले आने की संभावना है, वहीं दूसरी तरफ कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अंडमान और निकोबार की ओर रफ्तार पकड़ ली है और केरल में यह समय से पहले दस्तक दे सकता है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट है। इसके विपरीत, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के विदर्भ में लू से लोग बेहाल हैं। राजस्थान के बाड़मेर में गर्मी ने पिछले 31 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जहां तापमान 48.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। इस भीषण गर्मी के बीच गुजरात के जामनगर से राहत देने वाली खबर आई है। यहां के चिड़ियाघर में जानवरों और पक्षियों को चिलचिलाती धूप से बचाने के लिए फव्वारे और पानी के छिड़काव जैसे विशेष इंतजाम किए गए हैं।
पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सात सूत्रीय एजेंडा पेश किया है. प्रधानमंत्री के निर्देश पर उनके काफिले को डाउनसाइज किया गया है, जिसका व्यापक असर देशभर में देखा जा रहा है. केंद्रीय गृह मंत्री सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने सुरक्षा काफिले में गाड़ियों की संख्या सीमित कर दी है. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपना काफिला घटाकर तीन गाड़ियों का कर दिया है, जबकि राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने हवाई यात्रा और सुरक्षा प्रोटोकॉल में कटौती की है. मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग अब केवल एक गाड़ी का उपयोग कर रहे हैं और जस्टिस डी.डी. बंसल साइकिल से कोर्ट पहुंचे. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाया है. दिल्ली में परिवहन मंत्री डॉ. पंकज सिंह ने डीटीसी बस और मंत्री कपिल मिश्रा ने मेट्रो से सचिवालय तक का सफर तय किया. ईंधन संरक्षण के लिए नेता अब कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन का निरंतर उपयोग कर रहे हैं.
आज के दौर में जेन-जी (Gen Z) युवाओं के लिए बड़ी सैलरी और ऊंचे ओहदे के मुकाबले मानसिक शांति और वर्क-लाइफ बैलेंस अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. हाल ही में दिल्ली पुलिस का एक मामला चर्चा में रहा, जहां एक पुलिसकर्मी ने सब-इंस्पेक्टर पद पर प्रमोशन मिलने के बाद खुद डिमोशन की अर्जी दी ताकि वह अपनी पढ़ाई और निजी लक्ष्यों के लिए समय निकाल सके. इसी तरह, बेंगलुरु में एक कर्मचारी द्वारा 'मी-टाइम' के लिए मांगी गई छुट्टी को बॉस ने तुरंत मंजूरी दी, जो कार्यस्थल की बदलती संस्कृति को दर्शाता है. मनोवैज्ञानिक डॉ. कपिल कक्कड़ और डॉ. ज्योति कपूर के अनुसार, पिछली पीढ़ियों के 'सर्वाइवल मोड' के विपरीत आज की पीढ़ी 'एस्पिरेशन मोड' में जी रही है. युवा अब मानसिक तनाव से बचने के लिए अपनी सीमाएं तय कर रहे हैं और कॉर्पोरेट जगत को भी लचीले काम के घंटों और बेहतर माहौल के लिए नियम बदलने पड़ रहे हैं. यह बदलाव स्पष्ट करता है कि युवाओं के लिए अब सफलता का अर्थ केवल पैसा नहीं, बल्कि सुकून और मानसिक सेहत है.
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है. इस अपील के बाद सरकार ने सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है. इसमें 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर सेस शामिल है. पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण तेल और सोने की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है. भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी सोना आयात करता है और सालाना 700 से 800 टन सोने की खपत होती है. आयात शुल्क बढ़ने से आम ग्राहकों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाएगा. सरकार का मानना है कि इस कदम से व्यापार घाटा कम होगा और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. शादियों के मौसम में इस फैसले से आभूषण बाजार में असमंजस की स्थिति है, लेकिन कई लोग राष्ट्रहित में इस कदम का समर्थन कर रहे हैं और पुराने सोने के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना ना खरीदने की अपील की है। ईरान-इजराइल युद्ध और वैश्विक आर्थिक संकट के बीच भारत के आयात बिल को कम करने और रुपये को डॉलर के मुकाबले मजबूत करने के लिए यह अपील की गई है। भारत अपनी खपत का करीब 90 फीसदी सोना आयात करता है, जिस पर अरबों डॉलर खर्च होते हैं। शादियों के सीजन के बीच इस अपील से आम लोगों और सराफा बाजार में असमंजस की स्थिति है। हालांकि, कई ज्वेलर्स और आम लोग राष्ट्रहित में इस फैसले का समर्थन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि नए सोने की जगह घरों में रखे पुराने सोने को रोटेट किया जा सकता है या गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का इस्तेमाल किया जा सकता है। इतिहास में भी 1965 के युद्ध के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से एक समय का भोजन त्यागने की अपील की थी, जिसका सकारात्मक असर हुआ था।
ज्येष्ठ माह के बड़े मंगलवार को देशभर में बजरंगबली के भक्तों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार के हनुमान मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं. लखनऊ के हनुमान सेतु और अलीगंज मंदिर से लेकर अयोध्या की हनुमान गढ़ी और प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर तक, हर जगह सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ हो रहा है. जगह-जगह विशाल भंडारों का आयोजन किया जा रहा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को ही भगवान राम और हनुमान जी का पहली बार मिलन हुआ था. इस दिन हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाने का विशेष विधान है.
11 मई का दिन भारत की आध्यात्मिक और सामरिक शक्तियों के लिहाज से बेहद खास है। इसी दिन 1951 में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के मौजूदा स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इस ऐतिहासिक अवसर की 75वीं वर्षगांठ को अमृत महोत्सव के रूप में मनाया गया। इस भव्य कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री शामिल हुए और विशेष महापूजा के साक्षी बने। वैदिक मंत्रों के बीच 11 तीर्थ स्थलों के पवित्र जल से मंदिर का कुंभाभिषेक किया गया। इसके बाद भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई और वायुसेना की सूर्यकिरण टीम ने मनमोहक एयर शो का प्रदर्शन किया। दिलचस्प बात यह है कि 11 मई को ही भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी सामरिक शक्ति का अहसास कराया था। विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई बार ध्वस्त किए जाने के बावजूद सोमनाथ मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण भारत की अटूट आस्था और संकल्प शक्ति का प्रतीक है।
गुजरात के वेरावल में स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने पर 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' का भव्य आयोजन किया गया. इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ पहुंचकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक किया. कार्यक्रम की शुरुआत में पीएम मोदी ने हेलीपैड से मंदिर तक दो किलोमीटर लंबा रोड शो किया, जिसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी शामिल रहे. उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की. महोत्सव का मुख्य आकर्षण मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर हुआ 'कुंभाभिषेक' रहा, जिसमें क्रेन की सहायता से 11 पवित्र तीर्थों के जल से अभिषेक किया गया. इस दौरान भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण टीम ने 15 मिनट का एयरोबेटिक एयर शो प्रस्तुत किया और चेतक हेलीकॉप्टर से मंदिर परिसर पर पुष्प वर्षा की गई. ज्ञात हो कि 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इस मंदिर में शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा की थी, जिसके आज 75 वर्ष पूरे हुए हैं.
उत्तराखंड के हिमालय में स्थित पंच केदार भगवान शिव के पांच पवित्र धामों का समूह है। इन धामों में शिव के विभिन्न अंगों की पूजा की जाती है। केदारनाथ में भगवान शिव की पीठ, मध्यमहेश्वर में नाभि, तुंगनाथ में भुजाओं, रुद्रनाथ में मुख और कल्पेश्वर में उनकी जटाओं की पूजा होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद गोत्र हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए पांडव भगवान शिव की शरण में गए थे। शिव ने बैल का रूप धारण किया और जब भीम ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, तो उनके शरीर के पांच हिस्से अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। इन्हीं स्थानों को आज पंच केदार के रूप में जाना जाता है। केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जबकि तुंगनाथ दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है। कल्पेश्वर एकमात्र ऐसा धाम है जिसके कपाट साल भर खुले रहते हैं। इन धामों की यात्रा को मोक्ष प्राप्ति और आत्मिक शांति का मार्ग माना जाता है।
गर्मी का मौसम आते ही फलों के राजा आम की मांग बढ़ जाती है। भारत में आम की लगभग 1500 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें दशहरी, लंगड़ा, चौसा, अल्फांसो और तोतापुरी जैसी किस्में प्रमुख हैं। उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद का दशहरी और महाराष्ट्र का अल्फांसो अपनी मिठास के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और यहां से हर साल 40 से अधिक देशों में आम का निर्यात किया जाता है। अमेरिका में भारतीय आम की भारी डिमांड है, जहां 4800 रुपये का एक बॉक्स 20 मिनट में बिक जाता है। इसके अलावा, आम का भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में भी विशेष महत्व है। पूजा-पाठ, हवन और मांगलिक कार्यों में आम के पत्तों और लकड़ी का इस्तेमाल शुभ माना जाता है। साहित्य में भी मिर्ज़ा गालिब से लेकर कई कवियों ने आम की मिठास का जिक्र किया है।
दिल्ली पुलिस के पश्चिमी जिले ने सार्वजनिक पार्कों को नशा और अपराध मुक्त बनाने के लिए 'विमुक्त' नामक एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस मुहिम के तहत जिले के 265 पार्कों को चिन्हित कर वहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस ने स्थानीय लोगों को 'पार्क मित्र' बनाकर उनके साथ 'विमुक्त चौपाल' के जरिए संवाद स्थापित किया है। अभियान के तहत पुलिस नियमित रूप से शाम के समय पार्कों में गश्त कर रही है और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई कर रही है। पिछले 15 दिनों में पुलिस ने 444 बार पार्कों में गश्त की, 325 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया और 50 नाबालिगों की काउंसलिंग की। इसके अलावा दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत 4598 कानूनी कार्रवाइयां भी की गई हैं। इस पहल से पार्कों में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित माहौल बना है। अब लोग बिना किसी डर के पार्कों में टहलने और समय बिताने आ रहे हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा युवाओं को जागरूक करने के लिए 'नशा इज नॉट सो कूल' संदेश भी दिया जा रहा है।