गुड न्यूज टुडे में शक्ति उत्सव के तहत देशभर के प्रमुख देवी धामों की विशेष यात्रा दिखाई गई। नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन का विधान है। मध्य प्रदेश के आगरमालवा में स्थित मां तुलजा भवानी मंदिर छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी का धाम है, जो मराठा साम्राज्य की गौरवशाली विरासत से जुड़ा है। यहां एक प्राचीन गुफा है जो उज्जैन से जुड़ती है और जिससे देवी के प्रकट होने की मान्यता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में ज्वाला देवी मंदिर में बिना घी-बाती के सदियों से नौ ज्वालाएं जल रही हैं। मुगल बादशाह अकबर ने इस ज्वाला को बुझाने का प्रयास किया था लेकिन असफल रहे। वैज्ञानिकों ने भी इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सके। त्रिपुरा के उदयपुर में मां त्रिपुर सुंदरी का शक्तिपीठ इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था।
रामनवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी और इस बार कई दुर्लभ शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार रवि योग, पुनर्वसु नक्षत्र, अमृतसिद्धि योग, कर्क लग्न और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग वर्षों बाद देखने को मिल रहा है। अयोध्या में राम मंदिर में भव्य तैयारियां चल रही हैं। राम दरबार की स्थापना के बाद यह पहली रामनवमी है। सुबह 09:30 बजे अभिषेक के बाद दोपहर 12:00 बजे सूर्य तिलक होगा जो चार मिनट तक दिखाई देगा और इसका लाइव टेलीकास्ट होगा।
देशभर में दुर्गा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी हैं. इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष विधान है, जिसमें कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और भोजन कराया जाता है. दिल्ली के छतरपुर और झंडेवालान मंदिर से लेकर प्रयागराज, और महाराष्ट्र के अकोला व अमरावती तक के मंदिरों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. इसी के साथ देश में रामनवमी महोत्सव की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं. अयोध्या में राम मंदिर में होने वाले उत्सव पर सबकी निगाहें हैं, जहां रामलला के 'सूर्य तिलक' की विशेष तैयारी की गई है. प्रशासन ने अयोध्या में लगभग दस लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाते हुए भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में भी रामनवमी के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गई.
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के साथ देशभर के मंदिरों में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्य प्रदेश के राजगढ़ में भैंसवा माता के धाम में नवरात्र के छठे दिन भव्य दीपोत्सव का आयोजन हुआ जहां एक साथ 2,51,000 मिट्टी के दीपक जलाए गए। मां भैंसवा के मंदिर में संतान प्राप्ति की मान्यता है और जिनकी मनोकामना पूर्ण होती है वे मंदिर में पालना चढ़ाते हैं। मंदिर प्रांगण में पिछले पांच साल से 108 कुंडी महायज्ञ चल रहा है। वाराणसी में गंगा नदी के किनारे स्थित मां विशालाक्षी का शक्तिपीठ जहां भक्त सौंदर्य और संपदा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। यह धाम देवी के इक्यावन शक्तिपीठों में गिना जाता है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के मंदिर में भक्त अपनी मनोकामना कागज पर लिखकर अर्जी लगाते हैं। नवरात्र के दौरान मां वैष्णो देवी धाम में पिछले छह दिनों में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 48 साल के लंबे अंतराल के बाद खोला गया है. इस ऐतिहासिक अवसर पर, शुभ मुहूर्त के बीच खजाने में रखे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सोने, चांदी और बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित आभूषणों की गिनती की प्रक्रिया शुरू हुई. पिछली बार यह सूची 1978 में तैयार की गई थी. इस बार पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया की 3डी मैपिंग और वीडियोग्राफी की जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों, रत्न विशेषज्ञों, धातु विज्ञानियों और प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेषज्ञ टीम इस कार्य की निगरानी कर रही है. परंपरा के अनुसार, गिनती शुरू करने से पहले भंडार के रक्षक माने जाने वाले भगवान लोकनाथ की पूजा की गई. पहले दैनिक पूजा में उपयोग होने वाले आभूषणों (चलंती रत्न भंडार) की गिनती होगी, जिसके बाद भीतरी खजाने का मूल्यांकन किया जाएगा और उसका मिलान 1978 की सूची से होगा.
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 48 साल बाद खोला गया। दोपहर बारह बजकर बारह मिनट पर शुभ मुहूर्त में यह ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू हुई। इस रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के अलौकिक आभूषण, सोना, चांदी और बहुमूल्य रत्न संग्रहित हैं। आखिरी बार 1978 में इसकी गिनती हुई थी, जिसमें 72 दिन लगे थे। इस बार Videography, Photography और 3D Mapping के जरिए हर आभूषण का Digital Record तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञ सुनार, रत्न विशेषज्ञ और Reserve Bank के अधिकारी इस काम में शामिल हैं। 1978 की सूची के आधार पर वर्तमान सूची का मिलान किया जाएगा। मंदिर में दर्शन की व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। अंग्रेजों ने 1805 में पहली बार इस खजाने का सर्वेक्षण कराया था। बारहवीं शताब्दी से कलिंग के राजाओं ने युद्ध में जीते गए रत्न इस भंडार में समर्पित किए। मंदिर पर 18 बार आक्रमण हुए लेकिन पुजारियों ने गुप्त सुरंग के जरिए मूर्तियां और खजाना सुरक्षित रखा।
चैत्र नवरात्र के सातवें दिन देशभर में माँ दुर्गा के सातवें स्वरूप, माँ कालरात्रि की पूजा-अर्चना पूरी श्रद्धा से की जा रही है. मान्यता है कि माँ कालरात्रि की आराधना से भक्तों को भय और संकटों से मुक्ति मिलती है. इस अवसर पर दिल्ली के झंडेवालान मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. वहीं, अयोध्या में 27 मार्च को होने वाली भव्य रामनवमी की तैयारियां भी ज़ोरों पर हैं, जिसके लिए लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं. इस दिन का मुख्य आकर्षण दोपहर 12 बजे होने वाला 'सूर्य तिलक' होगा, जिसमें वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से सूर्य की किरणें चार मिनट तक सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी. प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए सुरक्षा और यातायात के व्यापक प्रबंध किए हैं, तथा कई मार्गों पर वाहनों का डायवर्जन भी लागू किया गया है. इसी के साथ, उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय चैती छठ महापर्व का भी समापन हो गया है.
अयोध्या में 27 मार्च को रामनवमी का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस दिन राम मंदिर में सुबह 9 बजे से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्री राम का पंचगव्य, सरयू जल और सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक होगा। दोपहर 12 बजे भगवान श्री राम के जन्म का प्रकट उत्सव मनाया जाएगा और इसके बाद सूर्य तिलक होगा। मिरर और लेंस के जरिए सूर्य की किरणें चार मिनट तक रामलला के मस्तक पर पड़ेंगी। मंदिर प्रशासन ने 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के लिए सुविधा और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए हैं। जगह-जगह होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी होगी। इस साल एक नई परंपरा शुरू हुई है - मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि से भगवान राम के लिए विशेष प्रसाद भेजा गया है जिसमें धनिया की पंजीरी, लड्डू, फल, पंचमेवा और वस्त्र शामिल हैं। देशभर के देवी मंदिरों में भी नवरात्र के दौरान मां दुर्गा की पूजा हो रही है।
मार्च महीने में उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है. इस बदलाव का मुख्य कारण पाकिस्तान और अफगानिस्तान के पास से सक्रिय हुआ पश्चिमी विक्षोभ है, जिसके चलते मैदानी इलाकों में बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी हो रही है. दिल्ली-एनसीआर में झमाझम बारिश हुई है, जबकि जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में भारी हिमपात दर्ज किया गया. केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम बर्फ की चादर से ढक गए हैं. पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि के कारण पिछले कुछ सालों में ऐसी एक्सट्रीम वेदर इवेंट्स की आवृत्ति बढ़ी है. मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि 28 मार्च तक गर्मी से राहत रहेगी और 26 तथा 29 मार्च को दिल्ली-एनसीआर में हल्की बारिश की संभावना है. इसके बाद तापमान में फिर बढ़ोतरी हो सकती है.
नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना के साथ देशभर के शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। टिहरी के चूलागढ़ पर्वत पर स्थित राज राजेश्वरी मंदिर में देवासुर संग्राम के दौरान मां दुर्गा के गिरे दिव्य शक्ति अस्त्र की पूजा होती है। यह अस्त्र आज भी गर्भगृह में सुरक्षित है। 14वीं शताब्दी में राजा सत्य सिंध ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। टिहरी के चंद्रबदनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा जहां देवी सती का बदन गिरा था। छत्तीसगढ़ के सुकमा में रामारामिन मंदिर है जहां मान्यता है कि वनवास के दौरान श्री राम ने भूदेवी की पूजा की थी। यह मंदिर राम वन गमन पथ पर स्थित है और आदिवासी समुदाय में इसकी गहरी आस्था है। हर नवरात्र में यहां नौ दिनों के लिए घट स्थापना होती है। गुजरात के जूनागढ़ में गिरनार जंगल की पहाड़ियों पर मां बाघेश्वरी का मंदिर स्थित है जो करीब आठ सौ साल पुराना है। यहां माता बाघों के साथ विराजमान हैं।
मुंबई के Gold Man के नाम से मशहूर रोहित पिसाल ने 20 करोड़ रुपए का हीरे से बना सेब तैयार किया है. यह अनोखा सेब भगवान बुद्ध और बाबा साहब अंबेडकर की स्मृति में बनाया गया है और उन्हें अर्पित किया गया है. रोहित पिसाल ने बताया कि यह सेब सामाजिक न्याय, समानता, बंधुत्व और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है. मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में इस सेब को भगवान बुद्ध और बाबा साहब को समर्पित किया गया. साथ ही भगवान बुद्ध की एक प्राचीन ऐतिहासिक प्रतिमा का भव्य अनावरण भी किया गया, जो 1954 में बाबा साहब और रोहित पिसाल के दादाजी को मिली थी. रोहित पिसाल Underwater Gold Mining का काम करते हैं और पूरी दुनिया में इस क्षेत्र में सिर्फ तीन कंपनियों को license मिला है जिनमें से एक उनकी है. उन्होंने कहा कि 14 अप्रैल तक बाबा साहब का घर खरीदना चाहते हैं जो बुरी हालत में है.