राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत, सीबीएसई ने स्कूलों के लिए एक नया थ्री-लैंग्वेज फॉर्मूला पेश किया है, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 के लिए अनिवार्य होगा. इस नियम के अनुसार, छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए. इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों में बहुभाषावाद को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक एकीकरण को मजबूत करना है. यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी और 2030-31 तक कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षाओं तक पूरी तरह से प्रभावी हो जाएगी. इस नीति में अंग्रेजी को एक विदेशी भाषा के विकल्प के रूप में रखा गया है. हालांकि, इस फॉर्मूले को लागू करने में स्कूलों के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें क्षेत्रीय भाषाओं के योग्य शिक्षकों की कमी और आवश्यक संसाधनों का अभाव प्रमुख है. इन समस्याओं से निपटने के लिए डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन शिक्षकों के उपयोग जैसे समाधानों पर विचार किया जा रहा है, ताकि अभिभावकों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े.
गुरुग्राम से एक ऑटो ड्राइवर और उसके दो मासूम बच्चों के अपहरण का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अपहरणकर्ता बच्चों को बोलेरो गाड़ी की डिग्गी में बांधकर मुरादाबाद-दिल्ली हाईवे की तरफ ले जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार बोलेरो सड़क किनारे खड़े एक टैंकर से टकरा गई। इस भयानक हादसे में तीन अपहरणकर्ताओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। चमत्कारिक रूप से डिग्गी में बंद दोनों बच्चे सुरक्षित बच गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्चों को रेस्क्यू किया। इसके बाद यूपी पुलिस ने अपने नए 'यक्ष ऐप' की मदद से घायल अपहरणकर्ता और उसके साथियों का आपराधिक इतिहास निकाला। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बंधक बनाए गए बच्चों के पिता को भी बरेली के एक घर से सुरक्षित छुड़ा लिया गया। यह पूरी घटना कुदरत के इंसाफ और पुलिस की तकनीकी मुस्तैदी का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।
NASA का ऐतिहासिक 'Artemis 2' मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. 10 अप्रैल 2026 को ओरियन कैप्सूल ने चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन किया. इस मिशन में कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल थे. 50 साल बाद हुए इस मानव मिशन ने पृथ्वी से 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तय कर अपोलो 13 का रिकॉर्ड तोड़ा. अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के डार्क साइड और दक्षिणी ध्रुव के क्रेटर्स का निरीक्षण किया. इस मिशन की सफलता में भारत का भी महत्वपूर्ण योगदान है, क्योंकि भारत ने आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और चंद्रयान मिशन का डेटा साझा किया है. यह सफलता भविष्य के 'Artemis 3' मिशन के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी, जिसका लक्ष्य चंद्रमा पर मानव लैंडिंग और संसाधन खोज है. वहीं, ISRO भी 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने के लक्ष्य पर काम कर रहा है. यह मिशन भविष्य के मंगल अभियानों के लिए एक आधार के रूप में कार्य करेगा.
गुड न्यूज़ टुडे के खास शो में मशहूर गायिका आशा भोसले के जीवन और उनके संगीतमय सफर पर विस्तार से चर्चा की गई है। आशा भोसले ने भारतीय सिनेमा को अपनी आवाज से एक नया मुकाम दिया है। उनके गानों में जिंदगी के हर रंग और बेफिक्री की झलक मिलती है। हालांकि, उनका निजी जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। महज नौ साल की उम्र में पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया। 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी की, जो बाद में टूट गई। इसके बाद आरडी बर्मन से शादी भी लंबे समय तक नहीं चल सकी। उनके जीवन में सबसे बड़ा दुख तब आया जब 2012 में बेटी वर्षा ने आत्महत्या कर ली और 2015 में बेटे हेमंत का कैंसर से निधन हो गया। इन तमाम त्रासदियों और शुरुआती दौर में बी और सी ग्रेड फिल्मों के गाने गाने जैसी चुनौतियों के बावजूद आशा भोसले ने संगीत का दामन नहीं छोड़ा और सफलता के शिखर पर पहुंचीं।
भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए 1000 किलोग्राम वजन वाले 600 स्वदेशी हवाई बमों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर रही है. रक्षा मंत्रालय ने 'मेक 2' और 'बाय इंडियन आईडीडीएम' श्रेणी के तहत इनके डिजाइन और विकास को मंजूरी दी है. ये बम अमेरिकी एमके-84 की श्रेणी के होंगे, जो दुश्मन के बंकरों, रनवे और सैन्य मुख्यालयों को नष्ट करने में सक्षम हैं. डीआरडीओ द्वारा विकसित 1000 किलो का विंग्ड ग्लाइड बम 'गौरव' और 550 किलो का 'गौतम' बम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. गौरव बम की मारक क्षमता 100 किलोमीटर तक है, जिसका सुखोई-30 एमकेआई से सफल परीक्षण किया जा चुका है. वर्तमान में वायुसेना के बेड़े में स्पाइस 2000, सुदर्शन और सॉ (SAAW) जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं. मिडिल ईस्ट के हालिया संघर्षों से सीख लेते हुए सेना को इन स्वदेशी स्मार्ट बमों से लैस किया जा रहा है. यह पहल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और विदेशी निर्भरता कम करने के उद्देश्य से की गई है.
इस समाचार बुलेटिन में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के पांच दशक लंबे करियर और उनके अदम्य साहस की अनसुनी कहानियों को पेश किया गया है। कार्यक्रम में बताया गया है कि कैसे उन्होंने एक अंडरकवर एजेंट के रूप में पाकिस्तान में सात साल बिताए और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारियां जुटाईं। इसके अलावा, मिजोरम में उग्रवाद को खत्म करने, स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान उनकी भूमिका, कंधार विमान अपहरण के समय उनकी बातचीत की रणनीति और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने जैसे ऐतिहासिक फैसलों में उनके योगदान पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। एपिसोड में इस बात का भी जिक्र है कि हाल ही में रिलीज हुई एक बॉलीवुड स्पाई थ्रिलर फिल्म में मुख्य किरदार उन्हीं के जीवन और कार्यशैली से प्रेरित है। यह रिपोर्ट देश की सुरक्षा में उनके द्वारा निभाए गए 'ट्रबल शूटर' के किरदार को बखूबी दर्शाती है।
राजस्थान के जैसलमेर और पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन ब्रह्मास्त्र' के तहत अपनी मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। इस युद्धाभ्यास में आधुनिक अपाचे हेलीकॉप्टर ने हिस्सा लिया, जिसे हवा का टैंक भी कहा जाता है। अपाचे से दागी गई घातक हेलफायर मिसाइलों ने सटीक निशाना लगाते हुए दुश्मन के डमी टैंकों को पलक झपकते ही नष्ट कर दिया। इसके साथ ही, स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर 'प्रचंड' की ताकत भी देखने को मिली। बेंगलुरु स्थित हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में सेना प्रमुख ने खुद प्रचंड हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी, जो सेना के स्वदेशी तकनीक पर भरोसे को दर्शाता है। प्रचंड 6000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है। अपाचे और प्रचंड की यह जुगलबंदी आधुनिक युद्ध में जमीनी सैनिकों को मजबूत हवाई सुरक्षा प्रदान करेगी। इस युद्धाभ्यास ने स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय सेना अब रक्षा के साथ-साथ आक्रामक रणनीति में भी पूरी तरह से सक्षम है, जो पड़ोसी देशों के लिए एक कड़ा संदेश है।
नासा का आर्टेमिस-2 मिशन चंद्रमा का चक्कर लगाने के बाद धरती पर वापस लौट रहा है। ओरियन कैप्सूल प्रशांत महासागर में स्प्लैश डाउन करेगा, जिसके लिए नासा ने पूरी तैयारी कर ली है। इस मिशन ने अंतरिक्ष में कई नए रिकॉर्ड बनाए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भी अपने पहले मानव मिशन 'गगनयान' की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने गगनयान मिशन के लिए दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए बेहद अहम है। इसके अलावा, भारत चंद्रयान-4 और चंद्रयान-5 मिशन की तैयारियों में भी जुटा है। चंद्रयान-4 का लक्ष्य चांद की सतह से मिट्टी और चट्टानों के नमूने धरती पर लाना है। इसरो ने 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चांद पर भेजने का बड़ा लक्ष्य रखा है। इन सभी मिशनों के जरिए भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की तैयारी कर रहा है।
नासा का ऐतिहासिक मून मिशन 'Artemis II' अपना 10 दिवसीय सफर पूरा कर धरती पर लौटने के लिए तैयार है. इस मिशन में सवार चार अंतरिक्ष यात्री—रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन—चांद की परिक्रमा कर 11 अप्रैल 2026 को भारतीय समयानुसार सुबह 5:37 बजे पृथ्वी पर पहुंचेंगे. इनका ओरियन कैप्सूल कैलिफोर्निया के सैन डिएगो तट के पास प्रशांत महासागर में 'स्प्लैशडाउन' करेगा. यह मिशन इसलिए खास है क्योंकि 1972 के अपोलो मिशन के बाद पहली बार इंसान चांद के इतने करीब पहुंचा है. इस यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा के दूरस्थ हिस्सों की तस्वीरें लीं और भविष्य में चांद पर बस्ती बसाने से जुड़े अहम प्रयोग किए.
उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में अप्रैल के महीने में मौसम का अनोखा रूप देखने को मिल रहा है. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है, जिससे अप्रैल में ही दिसंबर-जनवरी जैसी ठंड का एहसास हो रहा है. सिक्किम के लाचेन में भारी हिमपात और लैंडस्लाइड के कारण फंसे 135 पर्यटकों को भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन हिम सेतु' चलाकर सुरक्षित निकाला. उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियों के बीच केदारनाथ धाम 5 फीट बर्फ की चादर से ढका हुआ है. वहीं, कश्मीर के गुलमर्ग और सोनमर्ग में ऑफ-सीजन बर्फबारी ने पर्यटन को नया जीवन दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से अगले कुछ दिनों तक पहाड़ों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है.
ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर के 'रत्न भंडार' की गिनती और डिजिटल दस्तावेजीकरण का दूसरा चरण शुरू हो गया है। लगभग पांच दशकों (48 वर्ष) के बाद इस रहस्यमयी खजाने को खोला गया है। इस प्रक्रिया के लिए ओडिशा सरकार द्वारा 23 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें हैंडलिंग और सुपरवाइजिंग के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। ट्रांसस्क्रिप्ट के अनुसार, रत्न भंडार को तीन हिस्सों—चलित, बाहरी और भीतरी—में बांटा गया है। 25 मार्च को पहले चरण में चलित भंडार की गिनती पूरी हुई थी, और अब 8 से 11 अप्रैल तक बाहरी भंडार की इन्वेंट्री बनाई जा रही है। इस कार्य में आधुनिक 3D फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का उपयोग किया जा रहा है ताकि विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सके। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, यहाँ अथाह सोना, चांदी और बेशकीमती रत्न मौजूद हैं, जिनकी रक्षा स्वयं सर्प देवता और लोकपाल महादेव लोकनाथ करते हैं।