इस विशेष बुलेटिन में मकर संक्रांति के पावन पर्व की महत्ता और परंपराओं पर प्रकाश डाल रही हैं. 'मकर संक्रांति का यह पर्व दान पुण्य का पर्व है' और इस दिन सूर्य देव की उपासना से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. कार्यक्रम में प्रयागराज संगम और वाराणसी के घाटों से सीधी रिपोर्ट दिखाई गई, जहां लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. रिपोर्ट में बताया गया कि कैसे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही उत्तरायण की शुरुआत होती है और मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं. इसके साथ ही खिचड़ी के सेवन का ज्योतिषीय महत्व, तिल-गुड़ के दान की महिमा और पतंगबाजी के इतिहास पर भी विस्तृत जानकारी दी गई है. यह पर्व भारत की संस्कृति, विज्ञान और प्रकृति के अद्भुत मेल का प्रतीक है.
राजस्थान की वीर भूमि जयपुर में 78वां सेना दिवस भव्य रूप से मनाया जा रहा है. कार्यक्रम के दौरान सेना की बहादुरी और अनुशासन की झलक देते हुए आर्मी ऑफिसर्स परेड को लीड कर रहे हैं.' जयपुर के महल रोड पर आयोजित इस परेड में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और मिजोरम के राज्यपाल वीके सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. पहली बार सैन्य छावनी के बाहर आयोजित इस परेड में आत्मनिर्भर भारत की शक्ति का प्रदर्शन किया गया, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश डिफेंस सिस्टम और स्वदेशी ड्रोन तकनीक आकर्षण का केंद्र रहे. संवाददाता शिवानी शर्मा ने बताया कि परेड में रोबोटिक म्यूल्स और काउंटर ड्रोन सिस्टम जैसे आधुनिक हथियारों के जरिए चीन और पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया गया है.
प्रयागराज में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर संगम तट पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा है. प्रशासन को इस अवसर पर दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है. मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त कैमरे, और एटीएस (ATS) कमांडो की तैनाती की गई है. चप्पे-चप्पे पर निगरानी के लिए घुड़सवार पुलिस, डॉग स्क्वाड और जल पुलिस भी मुस्तैद है. मंडला आयुक्त सौम्या अग्रवाल के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम, शौचालय, और बिजली-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
देश में सूर्य के उत्तरायण का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है मकर संक्रांति पर्व का धार्मिक और आध्यातमिक महत्व है. सनातन परंपरा में सूर्य को अनंत ऊर्जा का स्रोत और साक्षात देव माना जाता है। वैसे तो साल में 12 बार भगवान सूर्य अपनी राशि परविर्तन करते हैं जिसे संक्रांति कहा जाता है ..लेकिन जब भगवान सूर्य शनि देव की राशि मकर में प्रवेश करते हैं...तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं.
देश भर में मकर संक्रांति का महापर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. ज्योतिषाचार्य Acharya Gaurav ने इस अवसर पर बताया कि इस बार मकर संक्रांति के साथ षटतीला एकादशी का अद्भुत संयोग बना है. उन्होंने कहा, 'आज सर्वसिद्धि योग और अमृत योग भी है, इस समय किया गया दान और स्नान अनंत गुना फलदायी होता है.' प्रयागराज के पावन संगम पर कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. आचार्य गौरव ने स्पष्ट किया कि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश दोपहर 3:07 बजे होगा, जिसे 'मकरे अर्क' कहा जाता है. उन्होंने यह भी सलाह दी कि आज एकादशी होने के कारण चावल का दान वर्जित है, इसके स्थान पर सफेद तिल का दान करना श्रेष्ठ रहेगा. रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार, वाराणसी और अयोध्या के घाटों पर भी श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखा गया, जहां लोग सूर्य उपासना कर आध्यात्मिक लाभ ले रहे हैं.
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सूर्य के उत्तरायण होने का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. ज्योतिषाचार्य अरविंद शुक्ला के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो देवताओं का दिन, उत्तरायण, प्रारंभ होता है, जो अत्यंत शुभ है. इस वर्ष सूर्य का यह राशि परिवर्तन दोपहर बाद होगा, जिसके उपरांत स्नान और दान का विशेष महत्व है. लगभग 35-40 वर्षों बाद मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बना है, जिससे दान-तप का पुण्य कई गुना बढ़ गया है. ज्योतिषी ने सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र 'ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते, अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर' भी साझा किया. इस अवसर पर प्रयागराज के माघ मेले, हरिद्वार और अयोध्या के सरयू तट पर कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, जिसके तहत मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा गया है.
आपको दिखाने जा रहे हैं ऐतिहासिक माघ मेले की अभूतपूर्व रौनक। रात के वक्त संगम दूधिया रोशनी से नहाया हुआ है। ऐसा लगता है जैसे संगम पर तारो का शहर बसा है। लाखों की तादाद में श्रद्धालु हैं। जबरदस्त उत्साह है। क्योंकि मकर संक्रांति का पवित्र स्नान होना है। जैसा जोश लोगों में है, उतना ही सतर्क प्रशासन है। भीड़ देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आने वाले लोगों को कोई भी तकलीफ ना हो इसलिए हर सुविधा है। आज आपको संगम के खूबसूरत रंगों के साथ विस्तार से मेले की तैयारी दिखाएंगे। इसके साथ ही आकर्षण का केन्द्र बने साधु संतों और बाबाओं से मिलवाएंगे। संगम पर मौजूद तीन दशक से ज्यादा पुराने देवरहा बाबा का मंडप और मां गंगा अखंड ज्योति के दर्शन भी करवाएंगे
देशभर में लोहड़ी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसकी रौनक अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर और नोएडा जैसे शहरों में विशेष रूप से देखने को मिली. गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'जीएनटी स्पेशल' में एंकर शगुफ्ता साहिल देव ने देशभर में हो रहे उत्सव की झलकियां पेश कीं. आध्यात्मिक गुरु वान्या आर्य ने लोहड़ी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश और नई फसल के आगमन का प्रतीक है.
Unidentified speaker ने मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल और माघ बिहू को प्रकृति-उत्सव बताते हुए उत्तरायण के साथ ‘शुभ दिनों’ की शुरुआत का वर्णन किया। वक्ता के अनुसार ‘प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाने वाले मकर संक्रांति के त्यौहार का सनातन परंपरा में अद्भुत महिमा है।’ ट्रांसक्रिप्ट में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, तिल-गुड़ और खिचड़ी के महत्व, तथा सूर्य को अर्घ्य देने और मंत्र-जप/पाठ जैसे कर्मकांडों का उल्लेख है। लोहड़ी की खरीदारी, रेवड़ी-गज्जक की मांग और दुल्ला भट्टी से जुड़ी लोककथा का जिक्र भी किया गया। साथ ही ‘दान के नियम’ बताते हुए अन्न, घी, वस्त्र, कंबल और तिल दान की बात कही गई।
अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का भव्य आगाज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ इस महोत्सव का उद्घाटन किया. यह महोत्सव 12 जनवरी से 14 जनवरी तक चलेगा. इस बार के आयोजन में एक रंग दोस्ती का भी दिखा, जब पीएम मोदी और अपनी पहली भारत यात्रा पर आए चांसलर मर्ज ने एक साथ पतंगबाजी का आनंद लिया. इस 14वें संस्करण के पतंग उत्सव में 50 देशों के 135 अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजों समेत देश के विभिन्न शहरों से भी प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं.
साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोगों से भरा है. इस वर्ष लगभग 100 वर्षों के बाद 'पंचग्रही योग' का निर्माण हो रहा है, जिसमें सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और चंद्रमा एक साथ मकर राशि में विराजमान होंगे. इसके साथ ही, करीब 22 साल बाद मकर संक्रांति (14 जनवरी) और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. इन महासंयोगों के साथ-साथ सर्वसिद्धि, अमृत सिद्धि और शुक्रादित्य जैसे अन्य राजयोग भी बन रहे हैं, जो स्नान, दान और पूजा के पुण्य फल को कई गुना बढ़ा देंगे. हालांकि, एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल का सेवन और दान वर्जित होने तथा 15 जनवरी को गुरुवार होने से खिचड़ी की परंपरा को लेकर उलझन है. जानकारों ने 17 जनवरी, शनिवार को खिचड़ी बनाने और दान करने को शुभ बताया है.