देशभर में लोहड़ी का त्योहार पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसकी रौनक अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर और नोएडा जैसे शहरों में विशेष रूप से देखने को मिली. गुड न्यूज टुडे के खास कार्यक्रम 'जीएनटी स्पेशल' में एंकर शगुफ्ता साहिल देव ने देशभर में हो रहे उत्सव की झलकियां पेश कीं. आध्यात्मिक गुरु वान्या आर्य ने लोहड़ी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पर्व सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश और नई फसल के आगमन का प्रतीक है.
Unidentified speaker ने मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल और माघ बिहू को प्रकृति-उत्सव बताते हुए उत्तरायण के साथ ‘शुभ दिनों’ की शुरुआत का वर्णन किया। वक्ता के अनुसार ‘प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी को मनाया जाने वाले मकर संक्रांति के त्यौहार का सनातन परंपरा में अद्भुत महिमा है।’ ट्रांसक्रिप्ट में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश, पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, तिल-गुड़ और खिचड़ी के महत्व, तथा सूर्य को अर्घ्य देने और मंत्र-जप/पाठ जैसे कर्मकांडों का उल्लेख है। लोहड़ी की खरीदारी, रेवड़ी-गज्जक की मांग और दुल्ला भट्टी से जुड़ी लोककथा का जिक्र भी किया गया। साथ ही ‘दान के नियम’ बताते हुए अन्न, घी, वस्त्र, कंबल और तिल दान की बात कही गई।
अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 का भव्य आगाज हो गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ इस महोत्सव का उद्घाटन किया. यह महोत्सव 12 जनवरी से 14 जनवरी तक चलेगा. इस बार के आयोजन में एक रंग दोस्ती का भी दिखा, जब पीएम मोदी और अपनी पहली भारत यात्रा पर आए चांसलर मर्ज ने एक साथ पतंगबाजी का आनंद लिया. इस 14वें संस्करण के पतंग उत्सव में 50 देशों के 135 अंतरराष्ट्रीय पतंगबाजों समेत देश के विभिन्न शहरों से भी प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं.
साल 2026 में मकर संक्रांति का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोगों से भरा है. इस वर्ष लगभग 100 वर्षों के बाद 'पंचग्रही योग' का निर्माण हो रहा है, जिसमें सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और चंद्रमा एक साथ मकर राशि में विराजमान होंगे. इसके साथ ही, करीब 22 साल बाद मकर संक्रांति (14 जनवरी) और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. इन महासंयोगों के साथ-साथ सर्वसिद्धि, अमृत सिद्धि और शुक्रादित्य जैसे अन्य राजयोग भी बन रहे हैं, जो स्नान, दान और पूजा के पुण्य फल को कई गुना बढ़ा देंगे. हालांकि, एकादशी के कारण 14 जनवरी को चावल का सेवन और दान वर्जित होने तथा 15 जनवरी को गुरुवार होने से खिचड़ी की परंपरा को लेकर उलझन है. जानकारों ने 17 जनवरी, शनिवार को खिचड़ी बनाने और दान करने को शुभ बताया है.
गुड न्यूज़ टुडे में आपका स्वागत है। आज के मुख्य समाचारों में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ धाम में एक भव्य शौर्य यात्रा में भाग लिया। यह आयोजन सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' का हिस्सा था। पीएम मोदी ने सोमनाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना और महाभिषेक किया और फिर शौर्य सभा को संबोधित करने के लिए सद्भावना ग्राउंड पहुंचे। इस दौरान उन्होंने वीर हमीरजी सर्किल पर शहीदों को नमन भी किया। बुलेटिन में आगे, आगामी कॉमेडी फिल्म 'वन टू चाचा चा' के निर्देशक अभिषेक राज ने खुलासा किया कि फिल्म की प्रेरणा एक वास्तविक जीवन की घटना से मिली है। इसके अलावा, उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड जारी है, मौसम विभाग ने 19 जनवरी के बाद राहत की उम्मीद जताई है।
मकर संक्रांति की तिथि को लेकर उलझन है कि पर्व 14 जनवरी को मनाया जाए या 15 जनवरी को. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को दोपहर में हो रहा है, जिसके चलते कई पंचांग इसी दिन पर्व मनाने की सलाह दे रहे हैं. वहीं, कुछ विशेषज्ञ उदया तिथि के आधार पर 15 जनवरी को इसे मनाना शास्त्रसम्मत मानते हैं. इस चर्चा में यह भी बताया गया कि 14 जनवरी को एकादशी होने के कारण चावल का सेवन वर्जित है, जबकि दान-पुण्य अगले दिन भी किया जा सकता है. मकर संक्रांति पर स्नान, दान और खिचड़ी का विशेष महत्व है. विशेषज्ञों ने तिल, चावल, दाल और वस्त्रों का दान लाभकारी बताया है. अंततः, श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र, पारिवारिक परंपरा और विवेक के अनुसार तिथि का चयन करने की सलाह दी गई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सोमनाथ धाम में तीन दिवसीय दौरे के दौरान 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के समापन समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर आयोजित एक भव्य शौर्य यात्रा में पीएम मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उप मुख्यमंत्री हर्ष सांघवी के साथ हिस्सा लिया, जहां उन्होंने डमरू बजाकर लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। यह पर्व सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया। इस बुलेटिन में अन्य प्रमुख खबरों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें गणतंत्र दिवस परेड 2026 में पहली बार लद्दाख के बैक्ट्रियन ऊंटों के शामिल होने की जानकारी दी गई। साथ ही, फीफा विश्व कप ट्रॉफी के 12 साल बाद भारत आगमन और दिल्ली में इसके अनावरण की खबर भी शामिल है, जिसमें केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त, गुजरात में अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव और अमिताभ बच्चन के एक प्रशंसक की अनूठी कहानी भी दिखाई गई।
दिल्ली की जमा देने वाली सर्दी में हज़ारों बेघर लोग फुटपाथ पर सोने को मजबूर हैं, जहां हर पल खतरा है। गुड न्यूज़ टुडे की इस खास रिपोर्ट में मनीषा झा ने इन लोगों की मुश्किलों को बयां किया है। एक बेघर व्यक्ति ने कहा, 'हम गरीब जरूर हैं पर जिंदगी में कभी कुछ गलत नहीं किया। शायद यही वह ताकत है जो हमें जिंदगी जीने का हौसला देती है।' यह रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे कुछ लोग आसमान को ही अपनी छत और ज़मीन को बिस्तर बनाकर जी रहे हैं। एक बच्चे के पास उसके सपनों के घर की ड्राइंग मिली। इस मुश्किल में दिल्ली पुलिस इन लोगों के लिए मददगार साबित हो रही है, जो उन्हें रैन बसेरों तक पहुंचा रही है। यह कहानी गरीबी, मजबूरी और इंसानियत की एक मार्मिक तस्वीर पेश करती है।
यह कहानी दर्द से शुरू होकर हिम्मत, संघर्ष और आत्मनिर्भरता पर आकर ठहरती है। यह उन एसिड अटैक सर्वाइवर्स की कहानी है जिन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी मुश्किल के आगे घुटने नहीं टेके। एक सर्वाइवर कहती हैं, 'चेहरा तुम बंद करो मुझे बंद करने की जरूरत नहीं है, आंखें तुम्हारी गंदी है, मेरी आंखें बहुत साफ है तो मैं ऐसे ही चलूंगी और ऐसे ही रहूंगी।' इस रिपोर्ट में कई महिलाओं ने अपनी आपबीती साझा की, जिसमें किसी को उसके पति ने, किसी को सौतेली माँ ने, तो किसी को पड़ोसी ने एसिड से जला दिया। इन महिलाओं ने छांव फाउंडेशन और सिरोज हैंगआउट कैफे के माध्यम से न केवल एक नया जीवन शुरू किया, बल्कि समाज के लिए एक मिसाल भी कायम की। इनमें से एक महिला को एक दिन के लिए जिले का डीएम भी बनाया गया, तो किसी ने 'छपाक' जैसी फिल्म में भी काम किया। ये सभी अब आत्मनिर्भर हैं और दूसरों को हौसला दे रही हैं।
एम्स और आईसीएमआर की हालिया स्टडी ने खुलासा किया है कि अच्छा दिखने का दबाव युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है. अध्ययन के अनुसार, लगभग 30% मोटे और 15% अधिक वजन वाले युवाओं में बॉडी इमेज को लेकर गहरी चिंता देखी गई है. यह समस्या सिर्फ मोटापे तक सीमित नहीं, बल्कि दुबलेपन से ग्रस्त युवा भी बॉडी इमेज एंजाइटी का सामना कर रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, परिवार, दोस्तों और सोशल मीडिया पर होने वाली बॉडी शेमिंग से युवाओं में लो सेल्फ-एस्टीम, डिप्रेशन और एंजाइटी बढ़ रही है. इस विषय पर मनोवैज्ञानिक डॉ. निशा खन्ना, न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. कनिका मल्होत्रा और लाइफस्टाइल कोच मीनल दत्ता ने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन पर जोर दिया. डॉ. खन्ना ने तनाव प्रबंधन के लिए 'S-T-R-E-S-S' फॉर्मूला (स्पोर्ट्स, ट्रिप्स, एंटरटेनमेंट, ईटिंग हैबिट्स, शेयरिंग, साउंड स्लीप) अपनाने की सलाह दी. विशेषज्ञों का मानना है कि सुंदरता से ज्यादा स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और फिटनेस पर ध्यान देना आवश्यक है.
एम्स और आईसीएमआर की एक हालिया स्टडी ने युवाओं में बढ़ती 'बॉडी इमेज एंग्जायटी' को लेकर चिंताजनक खुलासा किया है. इस अध्ययन में 18 से 30 साल के 1071 युवाओं को शामिल किया गया. एम्स के प्रोफेसर, डॉ. पीयूष रंजन के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त युवा, सामान्य वजन वालों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज एंग्जायटी का सामना करते हैं. डॉ. रंजन ने बताया कि वेट मैनेजमेंट प्रोग्राम अक्सर इसलिए असफल होते हैं क्योंकि उनमें व्यक्ति की साइकोलॉजी और आसपास के ओबेसोजेनिक माहौल को नजरअंदाज किया जाता है. मनोवैज्ञानिक डॉ. निशा खन्ना के अनुसार, बॉडी शेमिंग की शुरुआत बचपन में ही हो जाती है, जो आगे चलकर लो सेल्फ-एस्टीम और डिप्रेशन का कारण बनती है. विशेषज्ञों ने तनाव को मोटापे का एक बड़ा कारण बताते हुए प्राणायाम और मेडिटेशन युक्त एक संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया है.