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GNT स्पेशल

दुनिया के टॉप 20 बेस्ट स्ट्रीट फूड शहरों में मुंबई 10वें, जयपुर 15वें और दिल्ली 19वें नंबर पर, देखिए लिस्ट

13 अगस्त 2026

टाइम आउट मैगजीन की वर्ष 2026 की बेस्ट स्ट्रीट फूड शहरों की वैश्विक सूची जारी की गई है. इस अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में वियतनाम की हो ची मिन्ह सिटी पहले, मलेशिया का कुआलालंपुर दूसरे और इंडोनेशिया का जकार्टा तीसरे स्थान पर रहा है. भारत के तीन प्रमुख शहरों ने इस सूची के टॉप 20 में स्थान हासिल किया है. इसमें मुंबई 10वें, जयपुर 15वें और दिल्ली 19वें पायदान पर शामिल हैं. मुंबई के प्रसिद्ध व्यंजनों में वड़ा पाव, पाव भाजी, भेलपुरी और सेव पूरी शामिल हैं. वहीं जयपुर अपनी प्याज़ कचौड़ी, मूंग दाल चीला, दही बड़े, समोसा और 1944 से चली आ रही मशहूर लस्सी के लिए पहचाना गया है. दिल्ली की बात करें तो पुरानी दिल्ली और कमला नगर के बाजारों में मिलने वाले छोले भटूरे, बेड़मी पूरी, आलू टिक्की और चाट-पापड़ी को वैश्विक स्तर पर स्थान मिला है. इस सूची से भारतीय स्ट्रीट फूड संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है.

देशभर में स्वतंत्रता दिवस का उत्साह, लाल किले पर सुरक्षा की पुख्ता तैयारी..देखें खास रिपोर्ट

13 अगस्त 2026

देशभर में 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ जारी हैं. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत भव्य तिरंगा यात्राएं और रैलियां निकाली जा रही हैं. दिल्ली में लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण से पहले बहुस्तरीय सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. सुरक्षा व्यवस्था में 15,000 जवानों की तैनाती के साथ-साथ फेशियल रिकग्निशन सिस्टम वाले सीसीटीवी कैमरे और 'अभिज्ञान' मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे 1.32 करोड़ अपराधियों के डेटाबेस से संदिग्धों का तत्काल मिलान संभव हो सके. वहीं, लाल किले पर 105 एमएम लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी की रिहर्सल भी पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ शुरू हो गई है. दिल्ली के सदर बाजार में तिरंगे के निर्माण से लेकर कश्मीर घाटी तक हर तरफ राष्ट्रभक्ति का माहौल बना हुआ है.

यूरोप में छाया अंधेरा, भारत पर प्रभाव और ज्योतिषीय गणित समझें

12 अगस्त 2026

12 अगस्त को साल का दूसरा और आखिरी पूर्ण सूर्य ग्रहण लगा। यह खगोलीय घटना यूरोप, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका, कनाडा, आइसलैंड और ग्रीनलैंड जैसे इलाकों में देखी गई, जहां चंद्रमा ने सूर्य के 90 प्रतिशत से अधिक हिस्से को ढक दिया और दिन में ही अंधेरा छा गया। यूरोप में लगभग 27 साल बाद ऐसा पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा गया है। भारत में यह सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं दिया, इसलिए धार्मिक शास्त्रों के अनुसार यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा और मंदिरों के कपाट बंद नहीं किए जाएंगे। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कर्क राशि में बन रहे शुभ योगों का विभिन्न राशियों पर मिला-जुला प्रभाव पड़ेगा। वहीं, वैज्ञानिकों और नासा के विशेष अभियानों के लिए यह ग्रहण सूर्य के कोरोना और वायुमंडलीय बदलावों के अध्ययन का एक महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।

भारत में अदृश्य रहेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानिए क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

12 अगस्त 2026

इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। भारत में रात का समय होने के कारण यह ग्रहण देश में दिखाई नहीं देगा, जबकि यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा। भारत में दिखाई न देने की वजह से धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल लागू नहीं होगा और पूजा-पाठ संबंधी नियम बाध्यकारी नहीं होंगे। हालांकि ज्योतिष शास्त्रियों के अनुसार इसका प्रभाव देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक यह ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लग रहा है। इस दौरान बुधादित्य, हंस और गजकेसरी योग बन रहे हैं। ज्योतिष के जानकारों ने ग्रहण काल के दौरान शिव और नारायण के नाम स्मरण की सलाह दी है। इसके अलावा वेद, पुराण और महाभारत जैसे सनातनी ग्रंथों में भी सूर्य ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथाओं का उल्लेख मिलता है।

सावन में सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग, भारत में सूतक मान्य नहीं, जानिए सभी राशियों पर असर

12 अगस्त 2026

सावन महीने की हरियाली अमावस्या पर साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. भारतीय समयानुसार यह खगोलीय घटना रात 9:04 बजे शुरू होकर देर रात 1:28 बजे समाप्त होगी. भारत में दिखाई न देने के कारण देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा और मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे. यह ग्रहण यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन, पुर्तगाल, जर्मनी, इटली और फ्रांस में देखा जा सकेगा. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से कर्क राशि में चार ग्रहों के गोचर से चतुर्ग्रही योग बन रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर प्राकृतिक आपदाओं और भू-राजनीतिक तनाव की संभावना जताई गई है. मेष, वृष, मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों पर इसका अनुकूल प्रभाव पड़ेगा, जबकि कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर और कुंभ राशि वालों को सावधानी बरतने का सुझाव दिया गया है. आचार्यों ने ग्रहण काल के दौरान सूर्य देव के मंत्रों, गायत्री मंत्र और पितृ गायत्री जाप के साथ गेहूं, लाल मसूर की दाल और वस्त्र दान करने का परामर्श दिया है.

सावन अमावस्या पर साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, भारत में सूतक नहीं.. जानिए राशियों पर असर और उपाय

12 अगस्त 2026

साल 2026 का अंतिम सूर्य ग्रहण श्रावण अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के दिन लग रहा है. भारतीय मानकानुसार यह ग्रहण रात नौ बजकर चार मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह एक बजकर सत्ताईस मिनट तक रहेगा. यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिसके कारण देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा. हालांकि, यह यूरोप, ग्रीनलैंड, आइसलैंड और उत्तरी रूस जैसे क्षेत्रों में दिखाई देगा. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अशलेषा नक्षत्र में लग रहा है. इस दौरान कर्क राशि में बुध, सूर्य, गुरु और चंद्रमा की युति से चतुर्ग्रही योग बन रहा है. ज्योतिषविदों के अनुसार, भले ही भारत में ग्रहण दिखाई न दे, लेकिन इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा. ग्रहण के नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए सावन माह में भगवान शिव की विशेष पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और दान-पुण्य करने की सलाह दी गई है.

सावन शिवरात्रि पर देशभर के शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

11 अगस्त 2026

सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के प्रमुख शिवालयों में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। काशी विश्वनाथ मंदिर में ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। वहीं, प्रयागराज के प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर में भी सावन शिवरात्रि और अमावस्या के महासंयोग पर श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक किया। झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में सुल्तानगंज से 105 किलोमीटर नंगे पांव पदयात्रा कर पहुंचे कांवड़ियों और बड़ी संख्या में महिला शिव भक्तों ने पवित्र गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। इसके अलावा सहारनपुर के प्राचीन भूतेश्वर महादेव मंदिर और हरिद्वार के दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों ने कतारबद्ध होकर पूजा-अर्चना की। हरिद्वार में करीब चार करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भागीदारी के साथ वार्षिक कांवड़ मेला सकुशल और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया, जहां प्रशासनिक अधिकारियों ने भी जलाभिषेक कर आशीर्वाद लिया।

सावन शिवरात्रि पर शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु, कल लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक का नियम

11 अगस्त 2026

सावन के महीने में शिवरात्रि का पर्व देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं द्वारा भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के साथ मनाया जा रहा है. इस अवसर के तुरंत बाद श्रावण अमावस्या पर वर्ष का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लग रहा है. लगभग 18 वर्षों के बाद सावन माह में सूर्य ग्रहण का यह संयोग बन रहा है. भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण बुधवार रात 09:04 बजे से शुरू होकर गुरुवार तड़के 01:27 बजे तक रहेगा. भारत में दिखाई न देने के कारण यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा और धार्मिक स्थलों के कपाट खुले रहेंगे. यह ग्रहण यूरोप और अमेरिका समेत अन्य प्रभावित क्षेत्रों में दिखाई देगा. ज्योतिषाचार्यों ने शिवरात्रि पर जलाभिषेक, पार्थिव शिवलिंग पूजन, शिव मानस पूजा और दान-पुण्य के धार्मिक महत्व पर जानकारी साझा की है. इसके अतिरिक्त, विशेषज्ञों ने सूर्य ग्रहण के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों, सभी 12 राशियों पर इसके ज्योतिषीय प्रभाव तथा उनसे बचाव के उपायों का विस्तार से विवरण दिया है.

18 साल बाद सावन में लगेगा साल का अंतिम सूर्य ग्रहण, जानिए धार्मिक महत्व

11 अगस्त 2026

सावन की शिवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ रही है. गाजियाबाद के दूधेश्वरनाथ महादेव मंदिर से लेकर सहारनपुर के भूतेश्वर महादेव मंदिर तक भक्तों द्वारा जलाभिषेक किया जा रहा है. इस बार सावन के महीने में 18 साल बाद एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत खगोलीय संयोग बन रहा है. 12 अगस्त 2026 को श्रावण अमावस्या पर साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जो ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और अटलांटिक महासागर क्षेत्र में स्पष्ट दिखाई देगा. भारतीय समयानुसार यह ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे से देर रात 1:27 बजे तक रहेगा और रात 11:17 बजे अपने चरम पर होगा. चूंकि यह ग्रहण भारत में रात के समय पड़ेगा और दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. धार्मिक व ज्योतिषीय दृष्टिकोण के साथ-साथ वैज्ञानिकों के लिए भी यह खगोलीय घटना बेहद महत्वपूर्ण है.

सावन की शिवरात्रि पर उमड़ा भक्ति का सैलाब, 18 साल बाद बन रहा सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग

11 अगस्त 2026

सावन की शिवरात्रि के अवसर पर देशभर के मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। गाजियाबाद के दुधेश्वर महादेव मंदिर सहित तमाम शिवालयों में कांवड़िए गंगाजल अर्पित कर रहे हैं। वहीं इस पावन महीने में 18 साल बाद एक दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है। 12 अगस्त को साल 2026 का दूसरा और अंतिम पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 04 मिनट से देर रात 1 बजकर 27 मिनट तक रहेगा और रात 11 बजकर 17 मिनट पर अपने उच्चतम स्तर पर होगा। चूंकि यह ग्रहण भारत में रात के समय पड़ेगा, इसलिए देश में यह दिखाई नहीं देगा और इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दौरान जप-तप और धार्मिक अनुष्ठान फलदायी माने गए हैं, जबकि वैज्ञानिकों के लिए यह सूर्य से जुड़े रहस्यों को समझने का अनूठा अवसर है।

सावन के दूसरे सोमवार पर शिवालयों में उमड़ा भक्तों का सैलाब, महाकाल और काशी में हुआ विशेष श्रृंगार

10 अगस्त 2026

सावन महीने के दूसरे सोमवार और सोम प्रदोष के दुर्लभ महासंयोग पर देशभर के प्रसिद्ध शिवालयों में श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा. झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम, उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, हरिद्वार के दक्ष प्रजापति मंदिर और प्रयागराज के मनकामेश्वर मंदिर में तड़के आधी रात से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं. श्रद्धालुओं ने गंगाजल, पंचामृत और बेलपत्र से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और विशेष श्रृंगार किया. उज्जैन के महाकाल मंदिर में भस्म आरती के दौरान कई प्रमुख हस्तियों ने भी दर्शन किए. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन के सोमवार और प्रदोष काल में जलाभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इस पावन अवसर पर सावन शिवरात्रि का भी विशेष संयोग बन रहा है, जिसे लेकर शिव भक्तों और कांवड़ियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है.