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GNT स्पेशल

पूरे देश में होली का उल्लास और जोश, रंगोत्सव पर सुनिए श्री राम भजन और कृष्ण के लोकप्रिय धार्मिक गीत

04 मार्च 2026

इस कार्यक्रम में महाभारत की कथा के साथ विभिन्न धार्मिक भजनों का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में 'जाही विधि राखे राम ताही विधि रहिए' भजन प्रमुखता से सुनाया गया जिसमें श्री राम के प्रति समर्पण और विधि के विधान को स्वीकार करने का संदेश दिया गया। इसके अलावा 'सीताराम सीताराम कहिए' का जाप भी शामिल था। कृष्ण भक्ति में 'काहे राधा मोहे तंग किए जाए' और 'वृंदावन में रास रचाएं मुरली की धुन पे सबको नचाएं' जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए गए। होली के त्योहार पर 'होली खेले रघुवीरा अवध में' और 'पिचकारी से भीगे मोरी नहीं सारी' जैसे उत्सवी गीत भी सुनाए गए। कार्यक्रम का समापन 'जय जय श्री सीताराम' के जयकारे के साथ हुआ।

होली पर कवियों ने जमाई महफिल, रंग, उल्लास, टैरिफ और पाकिस्तान पर सुनाईं शानदार कविताएं

04 मार्च 2026

Good News Today के विशेष होली कार्यक्रम में कवियों की टोली ने समसामयिक विषयों और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं. इस सत्र में अमेरिका के टैरिफ, सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों, ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान संबंधों जैसे गंभीर मुद्दों को काव्य रूप में प्रस्तुत किया गया. कवियों ने चुनावी राजनीति, उत्तर प्रदेश के सियासी घटनाक्रम और बुलडोजर संस्कृति पर भी अपनी रचनाएं साझा कीं. कार्यक्रम में ब्रज की 40 दिवसीय होली परंपरा और राधा-कृष्ण के प्रेम का वर्णन किया गया. कवयित्री अनामिका अंबर ने सकारात्मकता का संदेश दिया, जबकि सुदीप भोला ने 'आरंभ है प्रचंड' की पैरोडी पेश की. पवन अग्रवाल ने यूपी की राजनीति और स्वाति खुशबू ने बिहार के पारंपरिक चैता व फाग के माध्यम से विरह वेदना को व्यक्त किया. इस आयोजन में बचपन की होली की यादों और आधुनिक युग के बदलावों की तुलना की गई. यह कार्यक्रम राजनीति, अर्थव्यवस्था और लोक संस्कृति के विविध रंगों का एक तथ्यात्मक मिश्रण रहा, जिसमें सामाजिक संदेशों के साथ-साथ पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति दी गई.

ब्रज की गलियों से हरियाणा की चौपाल तक रंगों का त्योहार, सुनिए होरा परंपरा और हरियाणा के फाग गीतों का संगम

04 मार्च 2026

होली के अवसर पर गुड न्यूज टुडे द्वारा एक विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसमें ब्रज और हरियाणा की होली की विविध परंपराओं का संगम देखने को मिला. इस कार्यक्रम में ब्रज की संस्कृति का प्रतिनिधित्व ब्रजवासी मधुकर ने किया, जबकि हरियाणा की लोक परंपराओं को कलाकार अमित ढुल ने जीवंत किया. मधुकर ने बताया कि ब्रज की होली राधा-कृष्ण के प्रेम को समर्पित श्रृंगार रस की उपासना है, जो बसंत से शुरू होकर चालीस दिनों तक चलती है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ब्रज में होली को 'होरा' कहा जाता है, जहाँ पुरुष भी सखी भाव में श्याम सुंदर के रंग में रंग जाते हैं. वहीं, अमित ढुल ने हरियाणा की ठेठ देसी होली का परिचय दिया, जहाँ देवर-भाभी के बीच होली खेलने का खास रिवाज है. यहाँ पारंपरिक फाग और डीजे संगीत के साथ रंगों का त्योहार मनाया जाता है. दोनों कलाकारों ने अपने-अपने क्षेत्रों के पारंपरिक गीत प्रस्तुत कर दर्शकों को सांस्कृतिक विविधता से परिचित कराया.

कवियों ने फाग गीत गाकर बांधा समां, देखिए जीएनटी की सुरीली होली

04 मार्च 2026

एक विशेष होली कार्यक्रम में बिहार और अयोध्या की पारंपरिक फाग संगीत प्रस्तुति दिखाई गई। कार्यक्रम में भगवान राम और सीता की होली के गीत प्रस्तुत किए गए, जिनमें 'राम सिया खेले होरिया वो रंग बरसे संवरिया' और 'होली में उड़े ला रंग गुलाल' जैसे पारंपरिक गीत शामिल थे। प्रस्तुतकर्ताओं ने समझाया कि फाग वह सुर है जो सीधे दिल से निकलता है और ढोलक की थाप पर झूम उठता है। कार्यक्रम में भगवान शिव और पार्वती की होली का भी वर्णन किया गया, जिसमें गाया गया कि 'पानिया लाले लाल हे गौरा हमरो के चाहि'। अयोध्य की पारंपरिक होली का वर्णन करते हुए बताया गया कि कैसे राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न ने कनक पिचकारी और अबीर से होली खेली। दर्शकों को होली पर्व की अनंत मंगल शुभकामनाएं दी गईं।

होली के दिन सजी कवियों की महफिल, कवियों ने सुनाई शानदार कविताएं

04 मार्च 2026

Good News Today के विशेष कार्यक्रम में होली के अवसर पर कवियों की टोली ने शिरकत की. इस सत्र में अनामिका अंबर, सुदीप भोला, पवन अग्रवाल और स्वाती खुशबू जैसे प्रसिद्ध कवियों ने जोगिरा और कविताओं के माध्यम से अपनी प्रस्तुतियां दीं. कार्यक्रम में पारंपरिक ब्रज की होली, राधा-कृष्ण के प्रेम और बिहार की चैता एवं फाग परंपरा का वर्णन किया गया. कवियों ने अपनी रचनाओं में समसामयिक विषयों जैसे सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों, अमेरिका के टैरिफ मुद्दों, व्यापार समझौतों और पाकिस्तान-चीन के संदर्भों को शामिल किया. सुदीप भोला ने 'आरंभ है प्रचंड' की तर्ज पर कविता पढ़ी, जबकि पवन अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश की सियासी होली पर कटाक्ष किया. अनामिका अंबर ने सकारात्मकता का संदेश देते हुए विषाक्त लोगों से दूर रहने की सलाह दी. इस आयोजन में बचपन की यादों के साथ-साथ आधुनिक सामाजिक और राजनीतिक विषयों का संगम देखने को मिला. सभी कवियों ने दर्शकों को सुरक्षित होली मनाने की शुभकामनाएं दीं और त्योहार के पारंपरिक रंगों को साझा किया.

होली सिर्फ रंग खेलने का नहीं, बुराइयों को निकालने का त्योहार, जानिए इसका महत्व

04 मार्च 2026

गुड न्यूज टुडे ने होली के विशेष कार्यक्रम में भागवत कथा वाचक देवी निधि सरस्वती, गायक पुष्कर सिन्हा और तबला वादक पीके झा को आमंत्रित किया। वृंदावन से जुड़ीं देवी निधि सरस्वती ने बताया कि होली का पर्व बुराइयों को निकालने और अच्छाइयों को धारण करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 'भक्ति हाथ पैर से नहीं होती है, भक्ति आंखों से नहीं होती है, भक्ति ताकत या सत्ता से नहीं होती है, भक्ति तो भाव से होती है, एहसास का नाम है भक्ति'। कार्यक्रम में एंकर शुभा साहिल देव ने होली के रंगों के महत्व पर बात की। पुष्कर सिन्हा ने कई पारंपरिक होली गीत प्रस्तुत किए। देवी निधि सरस्वती ने वृंदावन और बरसाने की विश्व प्रसिद्ध होली का जिक्र करते हुए राधा-कृष्ण की होली की परंपरा को समझाया।

कवियों की टोली के साथ सजी सुरीली महफिल, होली पर जोगीरा की मस्ती

04 मार्च 2026

गुड न्यूज़ टुडे पर होली के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस काव्य संध्या में अनामिका अंबर, सुदीप भोला, पवन अग्रवाल और स्वाति खुशबू जैसे कवियों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया. कार्यक्रम में होली के विविध रंगों को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें पारंपरिक होली गीतों से लेकर समसामयिक मुद्दों पर काव्यात्मक व्यंग्य शामिल थे. अनामिका अंबर ने 'anxiety का दहन करो, positivity के रंग भरो' के संदेश के साथ सकारात्मकता पर जोर दिया. वहीं, कवियों ने जोगीरा शैली में अमेरिका के टैरिफ विवाद, सोने-चांदी के बढ़ते भाव और भारत-पाकिस्तान संबंधों जैसे विषयों को छुआ. पवन अग्रवाल ने यूपी की सियासत को होली के रंग में पेश किया, तो स्वाति खुशबू ने बिहार की पारंपरिक चैता और फाग गायन की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम में ब्रज की चालीस दिवसीय होली और राधा-कृष्ण के प्रेम का भी सुंदर वर्णन किया गया.

देश भर में होली का उल्लास, इस बार रंगोत्सव पर कौन-सा रंग लगाएं?

03 मार्च 2026

होली 2025 के अवसर पर ज्योतिष और न्यूमेरोलॉजी विशेषज्ञों ने राशियों और मूलांक के अनुसार रंगों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की है. आचार्य राजमिश्रा, वान्या राय और श्रुति घरबंदा के अनुसार, मेष राशि के लिए लाल और गुलाबी रंग शुभ है, जबकि वृषभ के लिए हरा और मिथुन के लिए भगवान गणेश को हरा रंग अर्पित करना लाभकारी रहेगा. कर्क राशि हेतु सफेद और लाल चंदन, सिंह के लिए केसरिया और कन्या राशि के लिए पीला रंग आर्थिक स्थिरता लाएगा. तुला राशि के जातकों के लिए गोल्डन रंग, वृश्चिक के लिए गुलाबी-हरा, धनु के लिए पीला और मीन के लिए लाल-हरा रंग अनुकूल बताया गया है. कुंभ राशि वालों को होलिका दहन की राख का तिलक लगाने की सलाह दी गई है. अंकशास्त्र के अनुसार मूलांक 5 के लिए हरा, 6 के लिए सफेद, 7 के लिए ब्राउन, 8 के लिए नीला और 9 के लिए लाल रंग भाग्यवर्धक है. यह विशेष कार्यक्रम ग्रहों के गोचर और तत्वों के आधार पर होली खेलने के वैज्ञानिक और ज्योतिषीय उपायों पर केंद्रित है.

समाप्त हुआ साल का पहला चन्द्र ग्रहण, खुले मंदिरों के कपाट, जानिए कब तक रहेगा ग्रहण काल का असर?

03 मार्च 2026

Good News Today की विशेष कवरेज में चंद्र ग्रहण के वैज्ञानिक और ज्योतिषीय पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई. एस्ट्रोनॉमर अमिताभ पांडे ने इसे पृथ्वी की छाया का खगोलीय खेल बताया, वहीं ज्योतिषाचार्यों ने 100 साल बाद होली से पूर्व बने इस दुर्लभ संयोग और इसके वैश्विक प्रभावों का विश्लेषण किया. हरिद्वार की हर की पैड़ी पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान और जाप किया. ग्रहण काल के कारण गंगा आरती का समय बदलकर रात 8 बजे निर्धारित किया गया. ग्रहण मोक्ष के पश्चात मंदिरों के कपाट खुलने, मूर्तियों के अभिषेक और शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की गई. ज्योतिष विशेषज्ञों ने ग्रहण के बाद स्नान, दान और घर की सफाई को महत्वपूर्ण बताया. होलिका दहन के लिए शुभ मुहूर्त रात 8:50 तक बताया गया, जिसमें नारियल, लौंग और सप्तधान्य के प्रयोग की सलाह दी गई. इस कवरेज में विज्ञान और परंपरा के समन्वय के साथ-साथ होली पर्व की तैयारियों और विशेष उपायों पर भी जानकारी साझा की गई.

चंद्र ग्रहण पर सभी 12 राशियों के लिए उपाय, होली से पहले क्या करें और क्या न करें

03 मार्च 2026

होली के अवसर पर 500 साल बाद एक दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है, जहां साल का पहला चंद्रग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा पर लगा है. यह ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:46 बजे तक रहेगा, जो भारत में शाम 5:04 से 5:33 तक दिखाई देगा. इस दौरान बुधादित्य, शुक्र आदित्य और मालव्य योग भी बन रहे हैं. ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, सिंह राशि में लगने वाले इस ग्रहण का प्रभाव अगले 45 दिनों तक रहेगा, जिससे शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और धातुओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना है. कुंभ राशि में मंगल-राहु का अंगारक योग बना हुआ है. ग्रहण काल में जप-तप और मंत्रोच्चार को शुभ माना गया है, जबकि गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. सभी 12 राशियों पर इसके अलग-अलग प्रभाव पड़ेंगे, जिसके लिए विशेषज्ञों ने विशेष उपाय बताए हैं. हरिद्वार की हर की पैड़ी सहित विभिन्न स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं. ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान, दान और फिर होलिका दहन की प्रक्रिया संपन्न की जाएगी.

होली से पहले चंद्रग्रहण, 100 साल बाद बना दुर्लभ संयोग.. सूतक काल में क्या करें क्या नहीं?

03 मार्च 2026

होली से ठीक पहले साल 2025 का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक लगने जा रहा है. यह करीब तीन घंटे 27 मिनट तक चलेगा. ज्योतिष के मुताबिक 100 साल बाद होलिका दहन के ठीक बाद चंद्रग्रहण लग रहा है, जो एक दुर्लभ संयोग है। यह ग्रहण सिंह राशि में पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा. सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू हो चुका है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में भोजन बनाना, खाना, सोना और शुभ कार्य वर्जित हैं। हालांकि बच्चों, वृद्धों, रोगियों और गर्भवती महिलाओं को इससे छूट दी गई है.