प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू भी मौजूद रहे. लगभग 11,282 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है. इसके उद्घाटन के साथ ही उत्तर प्रदेश पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला भारत का पहला राज्य बन गया है. यह एयरपोर्ट इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के साथ मिलकर एक एकीकृत विमानन प्रणाली के रूप में काम करेगा, जिससे यात्रियों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी. पहले चरण में इसकी क्षमता सालाना 1.2 करोड़ यात्रियों की है, जिसे भविष्य में सात करोड़ तक बढ़ाया जाएगा. एयरपोर्ट में डिजिटल यात्रा, 3,900 मीटर लंबा कैट-3 सक्षम रनवे और एक विशाल कार्गो हब जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं, जिसे नेट-जीरो एमिशन लक्ष्य के साथ डिजाइन किया गया है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) का उद्घाटन करेंगे, इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहेंगे. 1400 हेक्टेयर में फैले इस एयरपोर्ट में 4 किलोमीटर लंबा रनवे है और यह CAT 3 तकनीक से लैस है, जिससे खराब मौसम और 50 मीटर की दृश्यता में भी विमान लैंड कर सकते हैं. शुरुआत में यह एयरपोर्ट घरेलू उड़ानों का संचालन करेगा, जिसके लिए इंडिगो, एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा जैसी एयरलाइंस ने आवेदन किया है. एयरपोर्ट के टर्मिनल का डिज़ाइन कमल के फूल से प्रेरित है और इंटीरियर में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और वृंदावन की कला की झलक मिलती है. यहाँ डिजी यात्रा, सेल्फ बैगेज ड्रॉप और 10 एयरो ब्रिज जैसी आधुनिक सुविधाएं हैं. पहले साल में 60 लाख यात्रियों की क्षमता के साथ, सभी चरण पूरे होने पर यह सालाना 7 करोड़ यात्रियों को संभालने वाला एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन सकता है. इस परियोजना से 50,000 से अधिक नौकरियों के अवसर पैदा होने और उत्तर प्रदेश की जीडीपी में वृद्धि का अनुमान है.
रामनवमी के शुभ अवसर पर अयोध्या में एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह से बादल छाए रहने के बावजूद, अभिजीत मुहूर्त में ठीक 12 बजे सूर्य की किरणें बादलों को चीरते हुए सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ीं। चार मिनट तक चला यह सूर्य तिलक आस्था और विज्ञान का अनूठा संगम था। सूर्य तिलक के बाद फिर से बादल छा गए। लगभग 10 लाख श्रद्धालु रामलला के जन्मोत्सव में शामिल होने अयोध्या पहुंचे। इसी दिन नवरात्र का अंतिम दिन भी था और देशभर में मां सिद्धिदात्री की पूजा हुई। महानवमी पर कन्या पूजन की परंपरा निभाई गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में कन्या पूजन किया। देशभर में रामनवमी पर शोभायात्राएं निकालीं गईं। नागपुर में 4,911 लोगों ने एक साथ महा आरती कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। कश्मीर के श्रीनगर में 36 साल बाद रघुनाथ मंदिर के कपाट खुले और राम नवमी मनाई गई।
रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में रामलला का 'सूर्य तिलक' विशेष चर्चा में रहा. खराब मौसम के बावजूद, विज्ञान की मदद से दर्पण और लेंस के माध्यम से सूर्य की किरणें नौ मिनट तक रामलला के मस्तक पर केंद्रित की गईं. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस आयोजन को लाइव देखा. देशभर में हुए आयोजनों में, 36 साल बाद श्रीनगर के रघुनाथ मंदिर में पूजा संपन्न हुई और नागपुर में 4,911 लोगों की महाआरती ने विश्व रिकॉर्ड बनाया. दूसरी तरफ, IPL 2025 का आगाज़ बैंगलोर में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मुकाबले से होगा, जिसमें 10 टीमें हिस्सा लेंगी. मनोरंजन जगत में, अभिनेत्री माधुरी दीक्षित वाराणसी में काशी विश्वनाथ के दर्शन करने पहुंचीं. वहीं, प्रधानमंत्री मोदी कल एशिया के सबसे बड़े कहे जा रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे.
अयोध्या में राम नवमी के पावन अवसर पर, राम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान रामलला का दिव्य 'सूर्य तिलक' संपन्न हुआ. दोपहर ठीक 12 बजे, लगभग चार से पांच मिनट के लिए सूर्य की किरणें वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत सीधे रामलला के मस्तक पर पड़ीं, जिससे उनका ललाट प्रकाशमान हो गया. इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान, पीतांबर वस्त्र धारण किए हुए रामलला के समक्ष शुक्ल यजुर्वेद के पुरुष सूक्त का पाठ किया गया. बादलों की मौजूदगी के बावजूद, तिलक के समय सूर्य देव प्रकट हुए. इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जिनके लिए मंदिर परिसर में विशेष डिस्प्ले स्क्रीन लगाई गई थीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस आयोजन को टेलीविजन पर देखा. इस अवसर पर कर्नाटक की सांस्कृतिक टीम द्वारा प्रस्तुति और भजन-कीर्तन भी हुए, जिसमें उज्बेकिस्तान सहित कई देशों के पर्यटक भी शामिल हुए.
रामनवमी के पावन अवसर पर अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में पहला भव्य राम जन्मोत्सव मनाया गया, जिसका मुख्य आकर्षण रामलला का 'सूर्य तिलक' रहा. दोपहर के समय सूर्य की किरणें विशेष ऑप्टिकल प्रणाली के माध्यम से रामलला के ललाट पर चार मिनट तक पड़ीं, जिससे एक दिव्य तिलक बना. इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे. रामलला ने पीतांबरी वस्त्र धारण किए और मंत्रोच्चार के बीच उनका अभिषेक किया गया. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी और उत्सव का सीधा प्रसारण देखने के लिए जगह-जगह डिस्प्ले स्क्रीन लगाए गए थे. देशभर के मंदिरों में भी रामनवमी की धूम रही, विशेषकर पटना के महावीर मंदिर में जहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और विशेष नैवेद्यम तैयार किया गया.
गुड न्यूज टुडे में शक्ति उत्सव के तहत देशभर के प्रमुख देवी धामों की विशेष यात्रा दिखाई गई। नवरात्रि की अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन का विधान है। मध्य प्रदेश के आगरमालवा में स्थित मां तुलजा भवानी मंदिर छत्रपति शिवाजी की कुलदेवी का धाम है, जो मराठा साम्राज्य की गौरवशाली विरासत से जुड़ा है। यहां एक प्राचीन गुफा है जो उज्जैन से जुड़ती है और जिससे देवी के प्रकट होने की मान्यता है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में ज्वाला देवी मंदिर में बिना घी-बाती के सदियों से नौ ज्वालाएं जल रही हैं। मुगल बादशाह अकबर ने इस ज्वाला को बुझाने का प्रयास किया था लेकिन असफल रहे। वैज्ञानिकों ने भी इस रहस्य को सुलझाने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो सके। त्रिपुरा के उदयपुर में मां त्रिपुर सुंदरी का शक्तिपीठ इक्यावन शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती के दाहिने पैर का अंगूठा गिरा था।
रामनवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी और इस बार कई दुर्लभ शुभ योग एक साथ बन रहे हैं। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार रवि योग, पुनर्वसु नक्षत्र, अमृतसिद्धि योग, कर्क लग्न और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग वर्षों बाद देखने को मिल रहा है। अयोध्या में राम मंदिर में भव्य तैयारियां चल रही हैं। राम दरबार की स्थापना के बाद यह पहली रामनवमी है। सुबह 09:30 बजे अभिषेक के बाद दोपहर 12:00 बजे सूर्य तिलक होगा जो चार मिनट तक दिखाई देगा और इसका लाइव टेलीकास्ट होगा।
देशभर में दुर्गा अष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत मां दुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगी हैं. इस दिन कन्या पूजन का भी विशेष विधान है, जिसमें कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और भोजन कराया जाता है. दिल्ली के छतरपुर और झंडेवालान मंदिर से लेकर प्रयागराज, और महाराष्ट्र के अकोला व अमरावती तक के मंदिरों में विशेष आयोजन किए जा रहे हैं. इसी के साथ देश में रामनवमी महोत्सव की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं. अयोध्या में राम मंदिर में होने वाले उत्सव पर सबकी निगाहें हैं, जहां रामलला के 'सूर्य तिलक' की विशेष तैयारी की गई है. प्रशासन ने अयोध्या में लगभग दस लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाते हुए भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में भी रामनवमी के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा निकाली गई.
नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा के साथ देशभर के मंदिरों में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मध्य प्रदेश के राजगढ़ में भैंसवा माता के धाम में नवरात्र के छठे दिन भव्य दीपोत्सव का आयोजन हुआ जहां एक साथ 2,51,000 मिट्टी के दीपक जलाए गए। मां भैंसवा के मंदिर में संतान प्राप्ति की मान्यता है और जिनकी मनोकामना पूर्ण होती है वे मंदिर में पालना चढ़ाते हैं। मंदिर प्रांगण में पिछले पांच साल से 108 कुंडी महायज्ञ चल रहा है। वाराणसी में गंगा नदी के किनारे स्थित मां विशालाक्षी का शक्तिपीठ जहां भक्त सौंदर्य और संपदा का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। यह धाम देवी के इक्यावन शक्तिपीठों में गिना जाता है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के मंदिर में भक्त अपनी मनोकामना कागज पर लिखकर अर्जी लगाते हैं। नवरात्र के दौरान मां वैष्णो देवी धाम में पिछले छह दिनों में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 48 साल के लंबे अंतराल के बाद खोला गया है. इस ऐतिहासिक अवसर पर, शुभ मुहूर्त के बीच खजाने में रखे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के सोने, चांदी और बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित आभूषणों की गिनती की प्रक्रिया शुरू हुई. पिछली बार यह सूची 1978 में तैयार की गई थी. इस बार पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया की 3डी मैपिंग और वीडियोग्राफी की जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों, रत्न विशेषज्ञों, धातु विज्ञानियों और प्रशासनिक अधिकारियों की एक विशेषज्ञ टीम इस कार्य की निगरानी कर रही है. परंपरा के अनुसार, गिनती शुरू करने से पहले भंडार के रक्षक माने जाने वाले भगवान लोकनाथ की पूजा की गई. पहले दैनिक पूजा में उपयोग होने वाले आभूषणों (चलंती रत्न भंडार) की गिनती होगी, जिसके बाद भीतरी खजाने का मूल्यांकन किया जाएगा और उसका मिलान 1978 की सूची से होगा.