एम्स और आईसीएमआर की एक हालिया स्टडी ने युवाओं में बढ़ती 'बॉडी इमेज एंग्जायटी' को लेकर चिंताजनक खुलासा किया है. इस अध्ययन में 18 से 30 साल के 1071 युवाओं को शामिल किया गया. एम्स के प्रोफेसर, डॉ. पीयूष रंजन के नेतृत्व में हुई इस रिसर्च के अनुसार, मोटापे से ग्रस्त युवा, सामान्य वजन वालों की तुलना में लगभग तीन गुना ज्यादा बॉडी इमेज एंग्जायटी का सामना करते हैं. डॉ. रंजन ने बताया कि वेट मैनेजमेंट प्रोग्राम अक्सर इसलिए असफल होते हैं क्योंकि उनमें व्यक्ति की साइकोलॉजी और आसपास के ओबेसोजेनिक माहौल को नजरअंदाज किया जाता है. मनोवैज्ञानिक डॉ. निशा खन्ना के अनुसार, बॉडी शेमिंग की शुरुआत बचपन में ही हो जाती है, जो आगे चलकर लो सेल्फ-एस्टीम और डिप्रेशन का कारण बनती है. विशेषज्ञों ने तनाव को मोटापे का एक बड़ा कारण बताते हुए प्राणायाम और मेडिटेशन युक्त एक संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया है.