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AIIMS Research: बच्चों में मोबाइल की लत से बढ़ रहा ऑटिज्म का खतरा, एम्स की रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की रिसर्च के अनुसार, बच्चों में मोबाइल की लत और अधिक स्क्रीन टाइम से ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) का खतरा बढ़ रहा है. डॉक्टरों के मुताबिक, जन्म से 18 महीने तक के बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए और 18 महीने से छह साल तक के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम एक घंटे तक सीमित होना चाहिए. अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बच्चों में 'वर्चुअल ऑटिज्म', आई कॉन्टैक्ट की कमी और स्पीच डिले जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं. रिसर्च में खराब खानपान, माइक्रोप्लास्टिक्स और प्रदूषण को भी न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार बताया गया है. सामाजिक संकोच के कारण माता-पिता अक्सर शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं, जिससे समय पर इलाज और थेरेपी में बाधा आती है. विशेषज्ञों ने देश में प्रशिक्षित थेरेपिस्ट की कमी और थेरेपी के खर्च पर चिंता जताई है. बच्चों के मानसिक विकास के लिए नियमित स्क्रीनिंग और फैमिली-सेंट्रिक अप्रोच अपनाने की सलाह दी गई है ताकि समय रहते सुधार लाया जा सके.