कथा में बद्रीनाथ धाम में सनत, सनन्दन, सनातन और सनत्कुमार की नारद जी से हुई भेंट के प्रसंग का वर्णन किया गया। नारद जी के उदास होने पर चारों भाइयों ने उनसे चिंता का कारण पूछा। नारद जी ने बताया कि वे मृत्युलोक में सत्संग के उद्देश्य से पुष्कर, प्रयाग, काशी, गोदावरी और रामेश्वरम जैसे विभिन्न तीर्थों में गए, लेकिन कलयुग के प्रभाव के कारण उन्हें कहीं भी सच्चा सत्संग प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि कलयुग में पाखंड, लोभ और दिखावा अत्यधिक बढ़ गया है। कथा में बताया गया कि साधु वही है जो अपनी चिंता छोड़कर दूसरों के कल्याण और भगवान के चिंतन में संलग्न रहता है। इसके साथ ही, संकीर्तन के माध्यम से भक्ति और भगवान के नाम स्मरण की महिमा को रेखांकित किया गया।