पांच मार्च की शाम जगन्नाथ धाम में बनकलगी अनुष्ठान संपन्न हुआ। इसके लिए मंदिर को शाम छह बजे से रात दस बजे तक चार घंटों के लिए बंद कर दिया गया और भक्तों का प्रवेश पूर्णतः वर्जित किया गया। यह अनुष्ठान सदियों से हर साल गोपनीयता के साथ निभाया जाता है। बताया जाता है कि इस अनुष्ठान में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ प्रतिमाओं के मुखमंडल का नव शृंगार किया जाता है। प्राकृतिक रंगों, जड़ी बूटियों, कस्तूरी और कपूर से विशेष लेप किया जाता है। केवल चुनिंदा सेवायत ही इस प्रक्रिया में शामिल होते हैं। जगन्नाथ धाम की महारसोई, रथयात्रा की परंपरा और मंदिर के अन्य रहस्यों पर भी विशेष जानकारी दी गई।