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Bombay High Court का बड़ा फैसला, पत्नी का खाना ना बनाना क्रूरता नहीं, शादी बराबरी का रिश्ता है

बॉम्बे हाई कोर्ट ने शादी और तलाक से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 24 साल पुराने तलाक के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि शादी एक बराबरी का रिश्ता है, कोई सर्विस कॉन्ट्रैक्ट नहीं. कोर्ट के अनुसार, यदि पत्नी खाना नहीं बनाती या घर के काम ठीक से नहीं करती, तो इसे मानसिक क्रूरता का आधार नहीं माना जा सकता. यह मामला साल 2002 का है, जिसमें पति ने पत्नी पर घरेलू जिम्मेदारियां न निभाने का आरोप लगाकर तलाक लिया था. हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने फैसले को पलटते हुए पत्नी के गुजारे भत्ते को मंजूरी दी और पति-पत्नी को दोबारा साथ रहने का आदेश दिया है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, शादी एक साझेदारी है जिसमें पत्नी नौकरानी नहीं होती. हालांकि, 24 साल अलग रहने के बाद साथ रहना व्यावहारिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इस फैसले ने वैवाहिक विवादों में फैमिली काउंसलिंग और 'इर्रिट्रीवेबल ब्रेकडाउन ऑफ मैरिज' जैसे कानूनी पहलुओं पर नई बहस छेड़ दी है.