चैत्र नवरात्र के अवसर पर देशभर के शक्तिपीठों और मंदिरों में मां कूष्मांडा और मां स्कंदमाता की विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है. नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की आराधना होती है, जिन्हें ब्रह्मांड की रचयिता और अष्टभुजा देवी माना जाता है. दिल्ली के छतरपुर, कालकाजी और झंडेवालान मंदिर सहित रायसेन के हिंगलाज शक्तिपीठ में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. मां कूष्मांडा सौर मंडल को ऊर्जा प्रदान करती हैं और उनकी पूजा से यश, बल व रोगों से मुक्ति मिलती है. वहीं पांचवें दिन मां स्कंदमाता की उपासना का विधान है, जो भगवान कार्तिकेय की माता और विशुद्ध चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं. बुध ग्रह से संबंधित समस्याओं, संतान सुख और वाणी दोष निवारण के लिए स्कंदमाता की पूजा फलदायी मानी जाती है. श्रद्धालु अखंड ज्योत प्रज्वलित कर मालपुए, केले की मिठाई और शहद का भोग अर्पित कर रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विधि-विधान से मंत्रोच्चार और दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है.