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China ने मिस्र में राफेल के साथ किया युद्धाभ्यास, क्या बेअसर होंगे भारतीय राफेल के सीक्रेट्स ?

मिस्र में आयोजित 'ईगल्स ऑफ सिविलाइजेशन 2026' युद्धाभ्यास के दौरान चीनी वायुसेना के J-16 फाइटर जेट्स ने मिस्र के राफेल जेट्स के साथ एयर कॉम्बैट ड्रिल में हिस्सा लिया. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन इस अभ्यास के जरिए राफेल की एयरोडायनामिक्स, रडार सिग्नेचर और पश्चिमी हवाई रणनीतियों का डेटा जुटाने का प्रयास कर रहा है, जिसे पाकिस्तान के साथ साझा किया जा सकता है. हालांकि भारतीय वायुसेना के राफेल जेट्स में 13 इंडिया-स्पेसिफिक अपग्रेड्स शामिल हैं, जो इन्हें मिस्र के मॉडल से अलग बनाते हैं. राफेल में लगा स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एक्स-गार्ड डिकॉय, थेल्स रडार और IRST सिस्टम इसे दुश्मन के रडार व मिसाइल ट्रैकर से 360-डिग्री सुरक्षा प्रदान करते हैं. यह विमान 9,500 किलोग्राम पेलोड ले जाने में सक्षम है और मिटीयर व स्कैल्प मिसाइलों से लैस है. भारतीय वायुसेना ने राफेल के दो स्क्वाड्रन अंबाला और हासिमारा एयरबेस पर तैनात किए हैं. हासिमारा से सिलीगुड़ी कॉरिडोर, डोकलाम और तिब्बत में चीनी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जबकि उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में यह चीन के J-20 स्टेल्थ फाइटर जेट को सीधी चुनौती देता है.