दिल्ली फायर सर्विस (DFS) ने साल 2051 तक खुद को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए 25 साल का एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है. इस योजना का उद्देश्य आग बुझाने के रिस्पॉन्स टाइम को 12-15 मिनट से घटाकर 7 मिनट से कम करना है. इसके लिए ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वेब-बेस्ड तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा. योजना के तहत फायर स्टेशनों की संख्या 196 और स्टाफ की संख्या लगभग 29 हजार की जाएगी. साथ ही, साल 2026 से नई इमारतों और 2030 तक पुरानी इमारतों में स्मोक डिटेक्टर अनिवार्य करने का प्रस्ताव है. वर्तमान में, दिल्ली फायर सर्विस स्टाफ की कमी का सामना कर रही है, जहां 12,000 कर्मियों की जरूरत के मुकाबले केवल 2,500 कर्मचारी ही 24 से 72 घंटे की शिफ्ट में काम कर रहे हैं. 24 घंटे चलने वाले कंट्रोल रूम से सूचना मिलने पर गाड़ियों को एक से दो मिनट में रवाना होना पड़ता है, लेकिन ट्रैफिक जाम और संकरी गलियां मौके पर पहुंचने में बाधा बनती हैं.