दिल्ली के श्यामनाथ मार्ग पर स्थित 'बंगला नंबर 33' को गिराने की तैयारी पूरी हो चुकी है। 100 साल पुराने इस आलीशान बंगले को दिल्ली की राजनीति में 'मनहूस' माना जाता रहा है। 1952 में दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्मप्रकाश से लेकर मदनलाल खुराना तक, जो भी यहाँ रहा उसका कार्यकाल समय से पहले खत्म हो गया। यहाँ तक कि पूर्व मंत्री दीपचंद बंधु की यहाँ रहते हुए मृत्यु हो गई। इस बुलेटिन में दिल्ली के इस विवादित बंगले के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के नोएडा और मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़े राजनीतिक अंधविश्वासों का भी विश्लेषण किया गया है। जहाँ सीएम योगी आदित्यनाथ ने नोएडा के मिथक को तोड़ा, वहीं सीएम मोहन यादव ने उज्जैन में रात न रुकने वाली दशकों पुरानी परंपरा को चुनौती दी है। यह रिपोर्ट सत्ता, शक्ति और अंधविश्वास के बीच के उस टकराव को दिखाती है जिसने कई बड़े नेताओं के फैसलों को प्रभावित किया।