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Indian Missiles: DRDO की बड़ी कामयाबी, 12 मिनट तक चला हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन का हुआ सफल परीक्षण, जानिए इसकी खासियत

भारत ने रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए डीआरडीओ (DRDO) के माध्यम से 'फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर' का 12 मिनट तक सफल परीक्षण किया है. हैदराबाद स्थित डीआरडीएल (DRDL) में हुए इस परीक्षण के बाद भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास 5 मैक से अधिक की हाइपरसोनिक तकनीक उपलब्ध है. यह इंजन भविष्य की 'ब्रह्मोस-2' मिसाइल का आधार बनेगा, जो मैक 7 से 8 की गति प्राप्त कर सकेगी. इसके साथ ही स्वदेशी 'मैन पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल' (MP-ATGM) का भी सफल परीक्षण किया गया है. गुड न्यूज़ टुडे के कार्यक्रम 'रणक्षेत्र' में अनीता रंधावा ने इजरायल से प्राप्त 'स्पाइक एनएलओएस' (Spike NLOS) मिसाइल की मारक क्षमता का विश्लेषण किया, जो 30 किमी दूर से दुश्मन के ठिकानों को नष्ट कर सकती है. बुलेटिन में स्वदेशी 'नाग', 'ध्रुवास्त्र' और 'अमोघा-3' जैसी एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के महत्व पर भी चर्चा की गई है, जो एलएसी पर चीन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं.