गणेश चतुर्थी के अवसर पर महाराष्ट्र सहित पूरे देश में दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है और मुंबई स्थित लालबागचा राजा पंडाल के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। इस दौरान भगवान गणेश की स्थापना और शास्त्रोक्त पूजन विधि का पूरा विवरण सामने आया है, जिसमें घर में बाईं तरफ सूंड वाली और बैठी मुद्रा की पार्थिव प्रतिमा स्थापित करने का विधान शामिल है। पूजन प्रक्रिया के अंतर्गत संकल्प, शांति पाठ, कलश, नवग्रह, षोडश मातृका और सप्तघृत मातृका के आवाहन के साथ प्राण प्रतिष्ठा के नियम बताए गए हैं। इसके साथ ही पंचामृत अभिषेक—दूध, दही, घी, शहद, शर्करा और गंधोदक—तथा वस्त्र, यज्ञोपवीत, सिंदूर, रोली, बेलपत्र और दुर्वा अर्पित करने की विधि स्पष्ट की गई है। वैदिक मंत्र ज्ञात न होने की स्थिति में 'ओम गं गणपतये नमः' मंत्र के जप से पूजा संपन्न करने का उल्लेख है। इसके अलावा मां गौरी पूजन, अखंड ज्योति का महत्व, गणेश जी को तुलसी वर्जित होने का पौराणिक प्रसंग, दुर्वा अर्पण के नियम तथा अंग पूजन और धूप-दीप दर्शन की संपूर्ण प्रक्रिया की जानकारी दी गई है।