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Ganesh Utsav: गणपति के 21 नाम, हर स्वरूप का रहस्य और प्रथम पूज्य होने का गूढ़ अर्थ

देशभर में गणेश उत्सव का महापर्व चल रहा है. इस पावन अवसर पर गुड न्यूज टुडे भगवान गणेश की महिमा और उनके विभिन्न स्वरूपों के गूढ़ अर्थ पर प्रकाश डाल रहा है. मान्यता है कि गणेश जी सभी विघ्न हरते हैं और गणेशोत्सव के 10 दिनों में उनके 21 नामों के जप से हर मनोकामना पूर्ण होती है. इन 21 नामों के साथ ही भगवान गणेश के विनायक, विकट, गजकर्णक, गणनाध्यक्ष, गजानन और भालचंद्र जैसे अनेक स्वरूपों का भी विस्तृत वर्णन किया गया है. प्रत्येक स्वरूप जीवन के लिए एक विशेष संदेश देता है, जैसे वक्रतुंड स्वरूप अमंगल को टालता है. सनातन धर्म में पंचदेवों में गणपति प्रथम पूज्य हैं. शिव-पार्वती विवाह में भी गणेश जी की विधिवत पूजा की गई थी. गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के बाल कांड में लिखा है: "मुनि अनुशासन गणपति ही पूज्य शंभू भवानी को सुनी संसय करेजनी सुर अनादि जिया जानी" यह दर्शाता है कि गणेश जी अनादि हैं. उनके लौकिक स्वरूप के प्रत्येक अंग, जैसे बड़ा सिर, छोटी आंखें, बड़े कान, छोटा मुंह, बड़ी सूंड़ और चार भुजाएं, जीवन जीने की कला सिखाते हैं. मोदक, पाश, अंकुश और आशीर्वाद की मुद्रा वाले हाथ क्रमशः आनंद, मर्यादा, मन पर नियंत्रण और परोपकार का संदेश देते हैं. गणेश जी के रिद्धि और सिद्धि से विवाह तथा शुभ और लाभ नामक पुत्रों का उल्लेख भी उनके गुणों और शक्ति में वृद्धि का प्रतीक है.