देशभर में गणेश उत्सव के समापन के अवसर पर अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति बप्पा का विसर्जन किया गया। मुंबई के गिरगांव चौपाटी, खेतवाड़ी से लेकर नागपुर और अकोला तक श्रद्धालुओं ने प्रतिमाओं का विसर्जन संपन्न किया। नागपुर में पर्यावरण संरक्षण और जल संकट के मद्देनजर 447 कृत्रिम टैंकों में विसर्जन की व्यवस्था की गई। इस दौरान गणेश विसर्जन से जुड़ी पौराणिक मान्यताओं, महाभारत काल के संदर्भों तथा महर्षि वेदव्यास द्वारा महाभारत लिखवाए जाने के बाद गजानन के शरीर की तपन शांत करने हेतु सरस्वती नदी में स्नान कराने की परंपरा पर प्रकाश डाला गया। इसके अतिरिक्त विसर्जन की पंचतत्वों में विलीन होने की प्रक्रिया, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के दृष्टिकोण से बुद्धि, केतु एवं बुध ग्रह से जुड़े आध्यात्मिक पहलुओं तथा उत्तर पूजन, विसर्जन पोटली और उत्तर दिशा में विदाई के धार्मिक नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।