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गुरु पूर्णिमा और सावन की शुरुआत: जानिए भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और उपवास के सही नियम

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, उज्जैन और शिर्डी सहित देशभर के पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं ने नदियों में स्नान और गुरु पूजन किया. आषाढ़ पूर्णिमा पर 56 साल बाद बुध-आदित्य, षष्ठ और हंस योग का संयोग बना. इस तिथि पर महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था. शिर्डी के साईं बाबा समाधि मंदिर को फूलों और रोशनी से सजाया गया. इसके साथ ही सावन महीने की शुरुआत हो रही है, जो 28 अगस्त तक चलेगा और इसमें चार सोमवार पड़ेंगे. कांवड़ यात्रा के लिए हरिद्वार, दिल्ली और काशी में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. धर्मगुरुओं ने गुरु महिमा में माता को प्रथम गुरु बताया और सावन में शिव उपासना के नियम स्पष्ट किए. शिवलिंग पूजन के लिए नर्मदेश्वर शिवलिंग उत्तर दिशा में स्थापित करने, कुमकुम, केतकी और नारियल पानी न चढ़ाने तथा बिल्वपत्र एवं ॐ नमः शिवाय जाप के धार्मिक महत्व की जानकारी दी गई.