इस कार्यक्रम में महाभारत की कथा के साथ विभिन्न धार्मिक भजनों का प्रसारण किया गया। कार्यक्रम में 'जाही विधि राखे राम ताही विधि रहिए' भजन प्रमुखता से सुनाया गया जिसमें श्री राम के प्रति समर्पण और विधि के विधान को स्वीकार करने का संदेश दिया गया। इसके अलावा 'सीताराम सीताराम कहिए' का जाप भी शामिल था। कृष्ण भक्ति में 'काहे राधा मोहे तंग किए जाए' और 'वृंदावन में रास रचाएं मुरली की धुन पे सबको नचाएं' जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए गए। होली के त्योहार पर 'होली खेले रघुवीरा अवध में' और 'पिचकारी से भीगे मोरी नहीं सारी' जैसे उत्सवी गीत भी सुनाए गए। कार्यक्रम का समापन 'जय जय श्री सीताराम' के जयकारे के साथ हुआ।