इस बार होलिका दहन पर भद्रा और चंद्रग्रहण दोनों का साया पड़ने वाला है। फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि शुरू होने के साथ ही भद्रा काल भी आरंभ हो गया है। भद्रा काल को अशुभ माना जाता है और इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। इस वजह से होलिका दहन का मुहूर्त 2 और 3 मार्च की रात 11:53 से 12:50 के बीच है। 3 मार्च को सुबह 6:26 से शाम 6:46 तक चंद्रग्रहण रहेगा। जो लोग 3 मार्च को होलिका दहन करेंगे, वे शाम 6:46 के बाद होलिका पूजन और दहन कर सकते हैं। मथुरा, अकोला सहित देशभर में होलिका दहन की तैयारी पूरी हो चुकी है। मथुरा के अंतापाड़ा बाजार में होलिका और प्रहलाद की प्रतिमाएं बड़े पैमाने पर बनाई जाती हैं। करीब 8 से 10 हजार होलिका प्रतिमाएं शहर भर में बिकती हैं। रंग वाली होली 4 मार्च को खेली जाएगी।