भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है. सवा तीन लाख करोड़ रुपये की इस मेगा डील के तहत कुछ विमान फ्रांस से आएंगे, जबकि शेष का निर्माण 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में होगा. इसके साथ ही राफेल के लिए 3200 करोड़ रुपये की स्कैल्प क्रूज मिसाइल और सुखोई-30 MKI को 'सुपर सुखोई' में अपग्रेड करने की योजना है. सुपर सुखोई में स्वदेशी वीरुपाक्ष रडार और नए इंजन लगाए जाएंगे. वायुसेना सुखोई जेट्स को 'मैन-अनमैन टीमिंग' (MUM-T) तकनीक और इजरायली 'रैम्पेज' मिसाइल से भी लैस कर रही है. स्वदेशी 'अस्त्र मार्क-2' मिसाइल 200 किलोमीटर की रेंज के साथ चीन की PL-15 को चुनौती देगी. इसके अतिरिक्त, भारत की पहली एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' और स्वदेशी हैमर स्मार्ट बम रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करेंगे. ये आधुनिक हथियार और तकनीक दुश्मन के रडार, बंकर और कम्युनिकेशन सिस्टम को ध्वस्त करने में सक्षम हैं.