भारतीय वायुसेना अपनी घटती स्क्वाड्रन संख्या को मजबूत करने के लिए फ्रांस से 114 नए राफेल फाइटर जेट खरीदने की प्रक्रिया में है. लगभग 36 अरब डॉलर की इस मेगा डील के तहत 18 विमान तैयार स्थिति में आएंगे, जबकि शेष 96 का निर्माण 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत भारत में किया जाएगा. रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत ने अमेरिका के F-35 और रूस के Su-57 के स्थान पर राफेल को प्राथमिकता दी है क्योंकि यह हिमालयी क्षेत्रों में चीन के J-20 का मुकाबला करने में सक्षम है. इस सौदे में सोर्स कोड और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) शामिल है, जिससे डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को स्वदेशी हथियारों के एकीकरण में सहायता मिलेगी. टाटा एडवांस सिस्टम्स के साथ मिलकर राफेल के फ्यूजलेज का निर्माण भारत में शुरू हो चुका है. अंबाला और हासीमारा एयरबेस पर इनकी तैनाती से चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर निगरानी बढ़ेगी. इसके अतिरिक्त, भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन की खरीद पर भी चर्चा जारी है, जिनकी आपूर्ति 2029 से संभावित है. मेटोर और स्कैल्प मिसाइलों से लैस यह विमान भारत की हवाई रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ करेगा.