रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है. भारतीय नौसेना ने अपनी पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमताओं को बढ़ाते हुए 'साइलेंट हंटर' कहे जाने वाले युद्धपोत आईएनएस माहे को अपने बेड़े में शामिल किया है. यह पोत डीजल इंजन और वाटर जेट प्रोपल्शन तकनीक से लैस है, जो इसे तटीय और उथले पानी में पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें बेअसर करने में सक्षम बनाता है. इसके अलावा, नौसेना लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा विकसित स्वदेशी ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV) 'अमोघ', 'अदम्य' और 'माया' को भी शामिल कर रही है, जो पानी के नीचे निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने का काम करेंगे. यह कदम पाकिस्तान द्वारा चीन से खरीदी जा रही हांगोर-क्लास पनडुब्बियों की चुनौती के बीच उठाया गया है. साथ ही, राफेल लड़ाकू विमानों के लिए 'हैमर' मिसाइलों का निर्माण अब भारत में ही किया जाएगा और सेना को एके-203 'शेर' असॉल्ट राइफलें भी दी जा रही हैं.