भारतीय सेना, नियंत्रण रेखा (LOC) से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) तक, अपनी सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए स्नाइपर्स को कठोर प्रशिक्षण दे रही है. 'एक गोली, एक कमांडर' के आदर्श वाक्य के साथ, इन सैनिकों को धैर्य, छलावरण और बेहतर अवलोकन जैसे गुणों में महारत हासिल कराई जाती है. सेना के स्नाइपर ट्रेनिंग कार्यक्रमों में व्यापक बदलाव किए गए हैं, जिसके तहत महू, गुलमर्ग और मिजोरम में विभिन्न परिस्थितियों के लिए बेसिक और एडवांस कोर्स चलाए जाते हैं. ये स्नाइपर हमेशा जोड़ी में काम करते हैं, जिसमें स्पॉटर लक्ष्य की दूरी और हवा की गति जैसी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है. आधुनिक हथियारों से लैस, भारतीय सेना के स्नाइपर ड्रैगुनोव एसवीयू, .338 लापुआ मैग्नम, सिग सॉर 716 और AK203 जैसी राइफलों का उपयोग करते हैं. विशेष रूप से, 500 मीटर रेंज वाली सिग सॉर 716 कभी जाम नहीं होती, जबकि AK203 इंसास से हल्की और अधिक घातक है. यह भारत के रक्षा क्षेत्र की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है कि अब 'मेड इन इंडिया' स्नाइपर राइफलों का निर्यात भी शुरू हो गया है.