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Indian Army के बेजोड़ स्नाइपर्स का दम, पूर्व NSG Commando Lucky Bisht से जानिए शौर्य की कहानी

भारतीय सेना के स्नाइपर्स को 'एक गोली, एक कमांडर' के आदर्श वाक्य के साथ प्रशिक्षित किया जाता है, जो अकेले ही पूरी बटालियन का सामना करने की क्षमता रखते हैं. LOC से लेकर LAC तक, इन योद्धाओं को मध्य प्रदेश के महू, गुलमर्ग और मिजोरम में 48 से 72 घंटे की कठोर ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें 500 से 1100 मीटर तक की रेंज में फायरिंग शामिल है. आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए, स्नाइपर ट्रेनिंग को बेसिक और एडवांस स्तरों में बांटा गया है. सेना की मारक क्षमता को अत्याधुनिक हथियारों से और बढ़ाया जा रहा है. इसमें SVD 7.62/54 MM R जैसी स्नाइपर राइफलें और इजराइल की Tavor असॉल्ट राइफलें शामिल हैं. एक बड़ा बदलाव INSAS राइफल को हटाकर AK-203 असॉल्ट राइफल को लाना है, जो हल्की और अधिक घातक है. 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत, भारत अब SIG Sauer 716i जैसी राइफलों के साथ-साथ स्वदेशी स्नाइपर राइफलों का निर्माण और निर्यात भी कर रहा है.