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International Yoga Day: वेद, पुराण और गीता में क्या है योग का महत्व? जानिए शिव और कृष्ण का योग संदेश

21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर देश और दुनिया में तैयारियां जोरों पर हैं. योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने की एक प्राचीन भारतीय विद्या है. भारतीय धर्मग्रंथों, वेदों, उपनिषदों, पुराणों और श्रीमद्भगवद्गीता में योग की विस्तृत व्याख्या की गई है. ऋग्वेद और अथर्ववेद में ध्यान और प्राणशक्ति का उल्लेख मिलता है, जबकि 108 प्रमुख उपनिषदों में से 20 को योग उपनिषद कहा गया है. मार्कंडेय, अग्नि, शिव और भविष्य पुराण में भी योग, ओंकार साधना और सूर्य नमस्कार का वर्णन है. भगवान शिव को योग का जनक माना जाता है, जिनके तांडव में संपूर्ण योग समाहित है. वहीं, भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग का संदेश दिया है. महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग भी इसी ज्ञान परंपरा का हिस्सा है. योग शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ जीवन को एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करता है.