ओडिशा के पुरी में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर के 'रत्न भंडार' की गिनती और डिजिटल दस्तावेजीकरण का दूसरा चरण शुरू हो गया है। लगभग पांच दशकों (48 वर्ष) के बाद इस रहस्यमयी खजाने को खोला गया है। इस प्रक्रिया के लिए ओडिशा सरकार द्वारा 23 सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया गया है, जिसमें हैंडलिंग और सुपरवाइजिंग के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। ट्रांसस्क्रिप्ट के अनुसार, रत्न भंडार को तीन हिस्सों—चलित, बाहरी और भीतरी—में बांटा गया है। 25 मार्च को पहले चरण में चलित भंडार की गिनती पूरी हुई थी, और अब 8 से 11 अप्रैल तक बाहरी भंडार की इन्वेंट्री बनाई जा रही है। इस कार्य में आधुनिक 3D फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का उपयोग किया जा रहा है ताकि विरासत को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सके। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, यहाँ अथाह सोना, चांदी और बेशकीमती रत्न मौजूद हैं, जिनकी रक्षा स्वयं सर्प देवता और लोकपाल महादेव लोकनाथ करते हैं।