उत्तराखंड के खूबसूरत पहाड़ों और 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ धाम में इन दिनों श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ रहा है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक इस धाम में भगवान शिव के कूबड़ यानी पीठ की पूजा होती है। गौरीकुंड से 14 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। मान्यता है कि केदारनाथ के दर्शन से समस्त पापों का शमन होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत काल में पांडवों को दर्शन देने के लिए भगवान शिव ने भैंसे का रूप धारण किया था और यहीं अंतर्ध्यान हुए थे। मंदिर के ठीक पीछे आदि गुरु शंकराचार्य की समाधि स्थित है। शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और बाबा केदार की पंचमुखी डोली उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में लाई जाती है, जहां छह महीने उनकी पूजा होती है।