अर्जेंटीना के एक बेहद साधारण परिवार में जन्मे इस दिग्गज फुटबॉलर का सफरनामा किसी प्रेरणा से कम नहीं है. बचपन में ही यह महान खिलाड़ी 'ग्रोथ हार्मोन डेफिशिएंसी' जैसी गंभीर बीमारी का शिकार हो गया था. परिवार के पास इलाज के पैसे नहीं थे, जिसके बाद उन्हें अपना देश छोड़कर स्पेन जाना पड़ा. वहां एक मशहूर फुटबॉल क्लब ने उनके इलाज का जिम्मा उठाया और एक नैपकिन पेपर पर कॉन्ट्रैक्ट साइन कर उन्हें अपनी टीम में शामिल किया. अपनी जादुई खेल प्रतिभा के दम पर इस खिलाड़ी ने न सिर्फ अपनी टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाईं, बल्कि अपने देश को 36 साल बाद विश्व कप का चैंपियन भी बनाया. आठ बार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर का खिताब जीतने वाले इस कप्तान ने अपने जीवन के संघर्षों से प्रेरणा लेते हुए दुनिया भर के बेबस और अनाथ बच्चों की मदद के लिए एक फाउंडेशन भी बनाया है. यह कहानी साबित करती है कि दृढ़ निश्चय से हर मुश्किल को पार किया जा सकता है.