भगवान गणेश को प्रथम पूज्य क्यों माना जाता है, इसका एक गूढ़ और अलौकिक रहस्य है जिसका संबंध मानव शरीर में मौजूद ऊर्जा के सात चक्रों से है. योग शास्त्र के अनुसार, गणपति मूलाधार चक्र के स्वामी हैं, जो रीढ़ के सबसे निचले हिस्से में स्थित पहला चक्र है. किसी भी आध्यात्मिक यात्रा या मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए सबसे पहले मूलाधार चक्र को जागृत करना अनिवार्य है. इसी चक्र में कुंडलिनी शक्ति गुप्त रूप में विद्यमान है. गणपति की आराधना और उनके स्वरूप का ध्यान करने से यह चक्र संतुलित और जागृत होता है, जिससे कुंडलिनी शक्ति का ब्रह्मांड की ऊर्जा से संबंध स्थापित होता है. एक वक्ता के अनुसार, "मोक्ष का जो पहला द्वार है, मोक्ष का जो पहला द्वार बताया गया है, वह बताया गया है भगवान गणेश जी को" इसी कारण किसी भी अनुष्ठान से पहले गणपति की वंदना की जाती है, क्योंकि उनकी कृपा के बिना आध्यात्मिक यात्रा का आरंभ संभव नहीं है.