सनातन धर्म के प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में भगवान श्री कृष्ण की जिन अलौकिक लीलाओं का वर्णन मिलता है, उनके ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्य आज भी मौजूद हैं. गुजरात के समुद्र तट पर स्थित पौराणिक द्वारका नगरी के पानी के नीचे मिले अवशेषों से लेकर मथुरा के पास स्थित गोवर्धन पर्वत तक, कई प्रमाण इनकी पुष्टि करते हैं. राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं को समुद्र की गहराइयों में प्राचीन पत्थर की दीवारें, खंभे और लंगर प्राप्त हुए थे. इसके अलावा वृंदावन स्थित निधिवन, जहां रंगमहल से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हैं, और कुरुक्षेत्र का ज्योतिसर तीर्थ, जहां अक्षय वट वृक्ष के नीचे भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश देने की मान्यता है, आस्था के बड़े केंद्र हैं. वहीं गुजरात के वेरावल स्थित देहोत्सर्ग तीर्थ में वह पीपल का वृक्ष मौजूद है जहां भगवान ने देह त्याग कर स्वधाम गमन किया था. यह सभी स्थल भगवान कृष्ण के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक प्रभाव को प्रमाणित करते हैं.