श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसंग में भगवान शिव द्वारा सुनाई गई अमर कथा और महर्षि वेदव्यास के पुत्र शुकदेव जी महाराज के प्राकट्य का वर्णन किया गया. कथा के अनुसार कैलाश पर्वत पर जब भगवान शिव माता पार्वती को अमर कथा सुना रहे थे, तब माता पार्वती के सो जाने पर एक छोटे तोते ने कथा सुनी और हुंकार भरी. कथा पूर्ण होने पर जब महादेव को इस बात का पता चला, तो वे त्रिशूल लेकर उस तोते के पीछे दौड़े. अपने प्राण बचाने के लिए वह तोता महर्षि वेदव्यास की पत्नी के मुख के माध्यम से उनके गर्भ में प्रविष्ट हो गया. महर्षि वेदव्यास ने भगवान शिव को स्मरण कराया कि अमर कथा सुनने के कारण वह जीव अब अमर हो चुका है. इसके बाद बारह वर्ष तक गर्भ में रहने के उपरांत वही जीव महर्षि वेदव्यास के पुत्र परमहंस शुकदेव जी महाराज के रूप में प्रकट हुआ, जिन्होंने आगे चलकर श्रीमद्भागवत कथा का जन-जन तक प्रचार किया.