चीन से रक्षा सौदे करने वाले देशों के लिए चीनी हथियार जंग के मैदान में बड़ी नाकामी साबित हो रहे हैं. सऊदी अरब द्वारा हूतियों पर दागी गई DF15A बैलिस्टिक मिसाइल लक्ष्य से पहले ही गिरकर फट गई, जिससे चीनी मिसाइल तकनीक पर सवाल उठे हैं. बांग्लादेश में सैन्य अभ्यास के दौरान चीन निर्मित Type 59 टैंक का बैरल फटने से दो सैनिकों की जान चली गई. कंबोडिया-थाईलैंड संघर्ष में चीनी MLRS रॉकेट सिस्टम और VT-4 टैंक भी तकनीकी खराबी के चलते विफल साबित हुए. पाकिस्तान में तैनात चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम और JF-17 लड़ाकू विमानों में तकनीकी खराबी और एयरफ्रेम क्रैक की समस्याएं सामने आई हैं. अमेरिका के ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला में लगा चीनी एंटी-स्टील्थ रडार भी नाकाम रहा. विशेषज्ञ गुणवत्ता की अनदेखी, घटिया पुर्जे, मेंटेनेंस की कमी और रिवर्स इंजीनियरिंग को चीनी हथियारों की विफलता का मुख्य कारण बता रहे हैं. SIPRI आंकड़ों के मुताबिक चीनी हथियारों के वैश्विक निर्यात में 5.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.