मकर संक्रांति के पावन अवसर पर सूर्य के उत्तरायण होने का ज्योतिषीय और आध्यात्मिक महत्व बताया गया है. ज्योतिषाचार्य अरविंद शुक्ला के अनुसार, जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो देवताओं का दिन, उत्तरायण, प्रारंभ होता है, जो अत्यंत शुभ है. इस वर्ष सूर्य का यह राशि परिवर्तन दोपहर बाद होगा, जिसके उपरांत स्नान और दान का विशेष महत्व है. लगभग 35-40 वर्षों बाद मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बना है, जिससे दान-तप का पुण्य कई गुना बढ़ गया है. ज्योतिषी ने सूर्य को अर्घ्य देने का मंत्र 'ॐ एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते, अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर' भी साझा किया. इस अवसर पर प्रयागराज के माघ मेले, हरिद्वार और अयोध्या के सरयू तट पर कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई. प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, जिसके तहत मेला क्षेत्र को कई सेक्टरों में बांटा गया है.