दीव के अरब सागर तट पर स्थित गंगेश्वर महादेव मंदिर में समुद्र की लहरें स्वयं शिवलिंग का जलाभिषेक करती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वनवास काल के दौरान पांडवों ने यहां पांच शिवलिंगों की स्थापना की थी। वहीं, प्रयागराज के प्रसिद्ध नाथेश्वरनाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए ताला बंद करते हैं और मन्नत पूरी होने पर उसे खोलते हैं। इसके अतिरिक्त, प्रयागराज के गंगा तट पर स्थित कोटेश्वर धाम का संबंध त्रेता युग से है, जहां भगवान श्रीराम ने ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए बालू के कणों से एक करोड़ शिवलिंग बनाकर आराधना की थी। बागपत के पुरा महादेव (परशुरामेश्वर महादेव) मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी, जहां से संसार की पहली कांवड़ यात्रा की शुरुआत मानी जाती है।