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GNT Special: मां कात्यायनी की आराधना, टिहरी से गुजरात तक देवी धामों में उमड़ी आस्था की भीड़

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना के साथ देशभर के शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। टिहरी के चूलागढ़ पर्वत पर स्थित राज राजेश्वरी मंदिर में देवासुर संग्राम के दौरान मां दुर्गा के गिरे दिव्य शक्ति अस्त्र की पूजा होती है। यह अस्त्र आज भी गर्भगृह में सुरक्षित है। 14वीं शताब्दी में राजा सत्य सिंध ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। टिहरी के चंद्रबदनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा जहां देवी सती का बदन गिरा था। छत्तीसगढ़ के सुकमा में रामारामिन मंदिर है जहां मान्यता है कि वनवास के दौरान श्री राम ने भूदेवी की पूजा की थी। यह मंदिर राम वन गमन पथ पर स्थित है और आदिवासी समुदाय में इसकी गहरी आस्था है। हर नवरात्र में यहां नौ दिनों के लिए घट स्थापना होती है। गुजरात के जूनागढ़ में गिरनार जंगल की पहाड़ियों पर मां बाघेश्वरी का मंदिर स्थित है जो करीब आठ सौ साल पुराना है। यहां माता बाघों के साथ विराजमान हैं।