संसद में बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल एडिक्शन पर गंभीर चर्चा के दौरान जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने स्मार्टफोन पैक्स पर तंबाकू उत्पादों की तरह वैधानिक चेतावनी देने का सुझाव दिया है. विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 10 में से 6 बच्चे मोबाइल एडिक्शन के शिकार हैं, जिससे उनका अटेंशन स्पैन और मेमोरी प्रभावित हो रही है. पीडियाट्रिशियन डॉ. डीके गुप्ता ने बताया कि हर चौथा बच्चा एडीएचडी (ADHD) के लक्षणों के साथ आ रहा है और डिजिटल लत के कारण भारत एडोलेसेंस डायबिटीज की कैपिटल बन रहा है. साइबर साइकोलॉजिस्ट निराली भाटिया ने बच्चों में बढ़ते इम्पल्सिव बिहेवियर पर चिंता जताई है. चर्चा में गाजियाबाद में तीन बहनों की आत्महत्या जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए पारिवारिक माहौल और सोशल मीडिया के खतरनाक प्रभावों को जिम्मेदार ठहराया गया. आंध्र प्रदेश और गोवा सरकारें सोशल मीडिया पर सख्त कानून बनाने पर विचार कर रही हैं. विशेषज्ञों ने स्कूलों में अनिवार्य साइकोलॉजिस्ट और पेरेंट्स द्वारा स्क्रीन टाइम की निगरानी करने पर जोर दिया है.