पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार 48 साल बाद खोला गया। दोपहर बारह बजकर बारह मिनट पर शुभ मुहूर्त में यह ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू हुई। इस रत्न भंडार में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के अलौकिक आभूषण, सोना, चांदी और बहुमूल्य रत्न संग्रहित हैं। आखिरी बार 1978 में इसकी गिनती हुई थी, जिसमें 72 दिन लगे थे। इस बार Videography, Photography और 3D Mapping के जरिए हर आभूषण का Digital Record तैयार किया जाएगा। विशेषज्ञ सुनार, रत्न विशेषज्ञ और Reserve Bank के अधिकारी इस काम में शामिल हैं। 1978 की सूची के आधार पर वर्तमान सूची का मिलान किया जाएगा। मंदिर में दर्शन की व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी। अंग्रेजों ने 1805 में पहली बार इस खजाने का सर्वेक्षण कराया था। बारहवीं शताब्दी से कलिंग के राजाओं ने युद्ध में जीते गए रत्न इस भंडार में समर्पित किए। मंदिर पर 18 बार आक्रमण हुए लेकिन पुजारियों ने गुप्त सुरंग के जरिए मूर्तियां और खजाना सुरक्षित रखा।