देश भर में राधाष्टमी का पावन अवसर आ गया है. ब्रज मंडल में राधा रानी जी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राधिका जी का प्राकट्य मथुरा जिले के गोकुल महावन कस्बे के नजदीक रावल गांव में हुआ था. वृषभानु और कीर्ति दा को यमुना महारानी की घोर तपस्या के बाद राधा रानी की प्राप्ति हुई थी. तत्व ज्ञानियों के मुताबिक, राधा की कृपा के बिना कृष्ण की महिमा को जान लेना असंभव है. कृष्ण अगर सृष्टि के रचयिता हैं तो राधा उनकी ऊर्जा हैं, कृष्ण शरीर हैं तो राधा आत्मा हैं. कृष्ण पुष्प हैं तो राधा सुगंध हैं. कृष्ण जल हैं तो राधा तरंग हैं. कृष्ण शब्द हैं तो राधा अर्थ हैं. कृष्ण गीत हैं तो राधा संगीत हैं. कृष्ण मुरली हैं तो राधा स्वर हैं. तत्वतः कृष्ण और राधा में कोई भेद नहीं है.