रक्षाबंधन के पावन पर्व पर देशभर के बाजारों में भारी उत्साह और रौनक देखी जा रही है. इस अवसर पर देवी-देवताओं के लिए विशेष विशालकाय राखियां तैयार की गई हैं. इंदौर के खजराना गणेश जी के लिए 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूर्ण होने की थीम पर चालीस इंच की महा राखी बनाई गई है, वहीं पुरी में भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के लिए बासूंगा टसर पाट से रक्षा सूत्र तैयार किए गए हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाई को राखी बांधने से पहले भगवान गणेश, शिव जी, कृष्ण जी और हनुमान जी को रक्षा सूत्र अर्पित करने की परंपरा है. बाजारों में इस बार रुद्राक्ष, डमरू, त्रिशूल तथा सोने, चांदी और हीरे से सजी राखियों का नया ट्रेंड देखा जा रहा है. झांसी से महिलाओं ने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए 500 राखियां भेजी हैं, वहीं अलवर में बनी राखियों का निर्यात 35 से अधिक देशों में हो रहा है. जानकारों ने धार्मिक प्रतीकों वाली राखियों को त्योहार के बाद कूड़े में फेंकने के बजाय जल प्रवाहित करने अथवा सुरक्षित रखने का सुझाव दिया है.