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Ayodhya से Panchavati तक: प्रभु श्रीराम के त्याग और रावण के दुस्साहस का वृत्तांत

Ramayana Full Story: पौराणिक वृत्तांत के अनुसार, लंका नरेश रावण के अत्याचारों और अधर्म के अंत के लिए भगवान विष्णु ने अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में अवतार लिया. पुत्रकामेष्ठी यज्ञ के उपरांत जन्मे प्रभु श्रीराम ने विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करते हुए ताड़का का वध किया और मिथिला में शिव धनुष तोड़कर माता सीता से विवाह किया. अयोध्या में राजतिलक की तैयारी के बीच माता कैकेयी द्वारा मांगे गए वचनों के कारण श्रीराम ने सहर्ष चौदह वर्षों का वनवास स्वीकार किया, जहां उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण भी गए. वनवास के दौरान चित्रकूट में भरत मिलाप हुआ, जहां भरत चरण पादुका लेकर लौटे. पंचवटी प्रवास में शूर्पणखा के अपमान का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से रावण ने मारीच को स्वर्ण मृग बनाकर भेजा और साधु वेश में छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लिया. गिद्धराज जटायु ने सीता जी की रक्षा हेतु रावण से भीषण संघर्ष कर अपने प्राणों की आहुति दी। अंत में प्रभु श्रीराम ने जानकी को खोजने और रावण के विनाश का दृढ़ संकल्प लिया.