भारत में तीर्थयात्राओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब युवा पीढ़ी (Gen Z) बड़ी संख्या में सनातन धर्म और अध्यात्म की ओर आकर्षित हो रही है. मथुरा, काशी, अयोध्या, केदारनाथ, वृंदावन और चारधाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर युवाओं की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है. उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में शामिल होने वाले कुल श्रद्धालुओं में युवाओं की भागीदारी लगभग 51 से 53 प्रतिशत तक दर्ज की गई है. भागदौड़ और तनाव से भरी जीवनशैली के बीच युवा अब मानसिक शांति, सुकून और आत्म-खोज के लिए आध्यात्मिक पर्यटन का रुख कर रहे हैं, जो कि कम खर्चीला भी है. कोरोना काल के बाद धर्म के प्रति बढ़ी जागरूकता, बेहतर सुविधाएं, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधुनिक वाद्ययंत्रों के साथ गाए जाने वाले भजनों ने युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ा है. इसके अलावा, लहसुन-प्याज छोड़ने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना और संतों का मार्गदर्शन भी इस बदलाव की मुख्य वजहें हैं.