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Jyotirlinga: सावन में करें 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, जानें सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक की पौराणिक कथाएं

सावन के पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है. प्रथम ज्योतिर्लिंग गुजरात का सोमनाथ मंदिर है, जहां चंद्रदेव ने दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति पाने के लिए तपस्या की थी. आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी किनारे स्थित मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को 'दक्षिण का कैलाश' कहा जाता है. उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर दुनिया का एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है, जहां भस्म आरती होती है. मध्य प्रदेश का ओंकारेश्वर मंदिर नर्मदा नदी तट पर स्थित है, जो ओम के आकार में ढला है. हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ धाम महाभारत काल में पांडवों द्वारा स्थापित त्रिकोणीय शिला के रूप में पूजा जाता है. इसके अतिरिक्त महाराष्ट्र में भीमाशंकर, नासिक में त्र्यंबकेश्वर, संभाजीनगर में घृष्णेश्वर, देवघर में बाबा वैद्यनाथ, गुजरात में नागेश्वर, वाराणसी में काशी विश्वनाथ और तमिलनाडु में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग की अपनी पौराणिक कथाएं और आध्यात्मिक महत्व हैं. सावन माह में इन धामों में जलाभिषेक और दर्शन से आरोग्य, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है.