शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता ने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी. मां के दाहिने हाथ में जपमाला और बाएं हाथ में कमंडल सुशोभित है. मान्यता है कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां की उपासना करने से कुंडली में चंद्रमा से जुड़ी समस्याओं के निवारण में सहायता मिलती है. मां को मिश्री, दूध से बनी मिठाइयां और शक्कर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. जानिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, भोग और विशेष धार्मिक उपाय.