साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 3:26 बजे से शाम 7:57 बजे तक प्रभावी रहेगा. खगोलीय दृष्टि से यह एक वलयाकार ग्रहण है, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढकता और आसमान में 'रिंग ऑफ फायर' की आकृति बनती है. एस्ट्रो साइंटिस्ट अमिताभ पांडे के अनुसार, पृथ्वी के झुकाव के कारण चंद्रमा की परछाई दक्षिणी हिस्से पर पड़ रही है, जिससे यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. हालांकि, अंटार्कटिका और दक्षिण अफ्रीका में इसे देखा जा सकेगा. ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है. विशेषज्ञों ने मेष, कन्या, तुला और मीन राशि के लिए इसे आर्थिक रूप से शुभ बताया है. भारत में सूतक काल मान्य न होने के बावजूद, विशेषज्ञों ने ग्रहण के दौरान 'ओम गृणि सूर्याय नमः' और विष्णु सहस्त्रनाम के जाप की सलाह दी है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बिना उचित फिल्टर के ग्रहण देखने से रेटिना को स्थायी नुकसान हो सकता है.