scorecardresearch
Advertisement

सांसारिक मोह-माया से मुक्ति का संदेश, ईश्वर से सच्चा नाता जोड़कर ‘तन से संसारी, मन से संन्यासी’ रहने की सीख

धार्मिक प्रवचन के दौरान सांसारिक मोह-माया और झूठे बंधनों से मुक्ति के उपाय पर विस्तार से प्रकाश डाला गया. एक दृष्टांत के जरिए समझाया गया कि जिस तरह बिना बंधी रस्सी का भ्रम ऊंट को बांधे रखता है, उसी तरह इंसान भी सांसारिक रिश्तों के काल्पनिक बंधनों में उलझा रहता है. इन बंधनों से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर से सच्चा नाता जोड़ने और 'तन से संसारी, मन से संन्यासी' रहकर जीवन व्यतीत करने का सुझाव दिया गया. प्रवचन में यह भी स्पष्ट किया गया कि जिस प्रकार जल के बिना नदी और मिठास के बिना मिठाई का कोई अस्तित्व नहीं होता, उसी प्रकार भक्ति और इंसानियत के बिना मानव जीवन व्यर्थ है. इसके साथ ही अज्ञान के अंधकार को मिटाने के लिए ज्ञान का दीपक जलाने और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के साथ-साथ नैतिक संस्कार देने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया.