सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट तक पहुंच को मौलिक अधिकार मानते हुए बच्चों के इंटरनेट इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है। अदालत ने डिजिटल स्वतंत्रता और ऑनलाइन सुरक्षा के बीच संतुलन पर जोर देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चाइल्ड मोड, प्राइवेट अकाउंट्स और सख्त पैरेंटल कंट्रोल लागू करने के निर्देश दिए हैं। बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और आपत्तिजनक कंटेंट की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार को राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार कर 10 दिसंबर तक रिपोर्ट सौंपने और एनसीईआरटी को शैक्षणिक सामग्री तैयार करने का आदेश दिया गया है। वहीं, साइबर एक्सपर्ट मुकेश चौधरी सहित विशेषज्ञों ने चर्चा में कहा कि कोविड के बाद बढ़े स्क्रीन एक्सपोजर के बीच बच्चों की सुरक्षा केवल कागजी नियमों से संभव नहीं है। इसके लिए सोशल मीडिया पर बायोमेट्रिक और फोटो आधारित पुख्ता एज वेरिफिकेशन सिस्टम, कड़े कानूनी प्रावधान, पेनाल्टी और टेक कंपनियों व अभिभावकों की साझी जवाबदेही जरूरी है।