साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फागुनी अमावस्या के दिन लग रहा है, जो ज्योतिष और विज्ञान, दोनों ही दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस अवसर पर आयोजित एक विशेष चर्चा में विशेषज्ञों ने इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला. खगोलशास्त्री अमिताभ पांडे के अनुसार, ग्रहण के शुभ या अशुभ प्रभाव का कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है और चंद्रमा के दूर जाने से लगभग 65 करोड़ साल बाद पृथ्वी से पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखना बंद हो जाएगा. वहीं, ज्योतिषीय दृष्टि से यह घटना इसलिए दुर्लभ है, क्योंकि 37 साल बाद कुंभ राशि में सूर्य, शुक्र, राहु, चंद्रमा और बुध का एक साथ गोचर करने से पंचग्रही योग बन रहा है. ज्योतिषियों का मानना है कि यह योग मानवीय प्रवृत्तियों पर प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इसे भयभीत होने के बजाय आत्मचिंतन और ऊर्जा संरक्षण के अवसर के रूप में देखना चाहिए. चर्चा में ऋग्वेद के अनुसार महर्षि अत्रि को ग्रहण का प्रथम आचार्य बताए जाने का भी उल्लेख किया गया.